Tuesday, March 31, 2026
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अगर किसानों को मिले MSP से कम दाम, तो सरकार देगी बाकी पैसा, जान लें कैसे ले सकते हैं फायदा


Bhavantar Bharpai Yojana: खेती-किसानी में सबसे बड़ा जोखिम तब होता है जब कड़ी मेहनत के बाद तैयार फसल को बाजार में औने-पौने दामों पर बेचना पड़ता है. कई बार बंपर पैदावार होने के बावजूद मंडियों में रेट इतने गिर जाते हैं कि किसानों की लागत निकलना भी मुश्किल हो जाता है. इसी समस्या का पक्का समाधान करने के लिए हरियाणा सरकार काफी समय से ‘भावांतर भरपाई योजना’ (Bhavantar Bharpai Yojana) चला रही है.

यह योजना उन किसानों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम करती है जो बाजार के उतार-चढ़ाव और गिरते दामों से डरे रहते हैं. इसका सीधा सा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसान को उसकी मेहनत का वाजिब दाम मिले और अगर बाजार का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) या संरक्षित मूल्य से नीचे चला जाए. तो जो भी घाटा होगा उसकी भरपाई सीधे सरकार करे. जान लें हरियाणा के किसान भाई इस योजना में कैसे लाभ लेकर अपनी खेती को घाटे से बच सकते हैं.

क्या है भावांतर भरपाई योजना?

भावांतर भरपाई योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को बाजार की अनिश्चितता से बचाना है. अक्सर देखा जाता है कि जब मंडी में आवक ज्यादा होती है. तो व्यापारी कीमतें गिरा देते हैं. जिससे किसान को नुकसान उठाना पड़ता है. इस योजना के तहत सरकार एक संरक्षित मूल्य तय करती है. अगर किसान अपनी फसल मंडी में बेचता है और उसे मिलने वाला दाम सरकार द्वारा तय भाव से कम होता है. तो सरकार उस अंतर की राशि यानी ‘भावांतर’ का भुगतान करती है:

  • मान लीजिए सरकार ने किसी फसल का भाव 2500 रुपये तय किया है और किसान ने उसे मंडी में 2200 रुपये में बेचा तो 300 रुपये का अंतर सरकार देगी.
  • यह अंतर की राशि सीधे किसान के आधार से लिंक बैंक खाते में डीबीटी (DBT) के माध्यम से ट्रांसफर की जाती है.

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान को फसल बेचने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता. उसे पता होता है कि नुकसान की भरपाई सरकार करेगी.

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योजना में कैसे मिलेगा लाभ?

हरियाणा में इस योजना का फायदा उठाने के लिए किसानों को कुछ जरूरी स्टेप्स फॉलो करने होते हैं. सबसे पहले तो अपनी फसल की बुवाई का सही ब्यौरा मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर दर्ज करना जरूरी है. मंडी में फसल बेचते समय मिलने वाली जे-फॉर्म (J-Form) या बिक्री की रसीद को संभाल कर रखना बहुत जरूरी है. क्योंकि इसी के आधार पर आपके नुकसान का आकलन किया जाता है:

  • पोर्टल पर समय रहते रजिस्ट्रेशन कराएं ताकि वेरिफिकेशन के बाद आप योजना के पात्र बन सकें.
  • यह योजना मुख्य रूप से बागवानी फसलों (सब्जियों और फलों) और बाजरा जैसी फसलों के लिए बहुत कारगर साबित हो रही है.

अगर मंडी का भाव सरकार द्वारा तय मूल्य से ज्यादा है. तो किसान को सीधे मंडी से ही अच्छा मुनाफा मिल जाता है. तब भरपाई की जरूरत नहीं पड़ती.

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