बेंगलुरु: भारत के मून मिशन यानी चंद्रयान-3 को लेकर भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने एक और बड़ी जानकारी दी है. इसरो यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने जानकारी दी कि इस साल 14 जुलाई को चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान को निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित करने वाले एलवीएम3 एम4 प्रक्षेपण यान का ‘क्रायोजेनिक’ ऊपरी हिस्सा बुधवार को पृथ्वी के वायुमंडल में अनियंत्रित रूप से पुनः प्रवेश कर गया.
दरअसल, इसरो ने अपने एक आधिकारिक बयान में कहा, ‘संभावित प्रभाव बिंदु का अनुमान उत्तरी प्रशांत महासागर के ऊपर लगाया गया है. अंतिम ‘ग्राउंड ट्रैक’ (किसी ग्रह की सतह पर किसी विमान या उपग्रह के प्रक्षेप पथ के ठीक नीचे का पथ) भारत के ऊपर से नहीं गुजरा.’ इसरो ने बताया कि यह ‘रॉकेट बॉडी’ एलवीएम-3 एम4 प्रक्षेपण यान का हिस्सा थी. यह अंतरराष्ट्रीय समयानुसार दोपहर दो बजकर 42 मिनट के आसपास पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश कर गया. इसरो ने कहा कि रॉकेट बॉडी का पुन: प्रवेश इसके प्रक्षेपण के 124 दिनों के भीतर हुआ.
बता दें कि चंद्रयान-3 मिशन के साथ भारत ने 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ कर इतिहास रच दिया था और ऐसा करने वाला यह दुनिया का पहला देश बन गया था. इसके साथ ही भारत चंद्रमा पर सफल ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के साथ अमेरिका, पूर्ववर्ती सोवियत संघ और चीन के बाद ऐसा करने वाला विश्व का चौथा देश बन गया था. इसरो ने चंद्रमा पर रात होने से पहले क्रमशः 4 और 2 सितंबर को लैंडर तथा रोवर को निष्क्रिय अवस्था (स्लीप मोड) में डाल दिया था, जिनके 22 सितंबर के आसपास अगले सूर्योदय पर फिर से सक्रिय होने की उम्मीद थी. लैंडर और रोवर को एक चंद्र दिवस की अवधि (पृथ्वी के लगभग 14 दिन) तक कार्य करने के लिए डिजाइन किया गया था.

इसरो के अधिकारियों के अनुसार, चंद्रयान-3 मिशन के सभी तीन उद्देश्य हासिल कर लिए गए हैं जिनमें चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित ‘सॉफ्ट लैंडिंग’, चंद्रमा पर घूमने वाले रोवर का प्रदर्शन और चंद्र सतह पर वैज्ञानिक प्रयोग शामिल हैं. बता दें कि चांद के जिस हिस्से पर चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग हुई थी, उसका नाम शिवशक्ति प्वाइंट रखा गया है और इसकी सूचना खुद पीएम मोदी ने दी थी.
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Tags: Chandrayaan-3, ISRO, Mission Moon
FIRST PUBLISHED : November 16, 2023, 07:10 IST


