नई दिल्ली. देश में कोरोना वायरस के ‘जेएन.1’ उपस्वरूप के अब तक कुल 1200 मामले सामने आए हैं. शनिवार को INSACOG ने बाताया कि नए केस वाले राज्य में नगालैंड भी शामिल हो गया है. भारत में जेएन.1 के मामले 17 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में पहुंच चुका है.
पीटीआई की खबर के अनुसार, भारतीय सार्स-कोव-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (इंसाकॉग) द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक में जेएन.1 के सबसे अधिक 215 मामले दर्ज किए गए हैं. आंध्र प्रदेश में 189, महाराष्ट्र में 170, केरल में 154, पश्चिम बंगाल में 96, गोवा में 90, तमिलनाडु में 88 और गुजरात में 76 मामले सामने आए हैं.
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आंकड़ों के मुताबिक, तेलंगाना और राजस्थान में ‘जेएन.1’ के 32-32, छत्तीसगढ़ में 25, दिल्ली में 16, उत्तर प्रदेश में 7, हरियाणा में 5, ओडिशा में 3 और उत्तराखंड तथा नागालैंड में एक-एक मामला दर्ज किया गया है. देश में कोविड मामलों की संख्या में वृद्धि और ‘जेएन.1’ उपस्वरूप का पता चलने के बीच केंद्र ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से निरंतर निगरानी बनाए रखने को कहा है.
राज्यों को कोविड-19 मामलों की बढ़ती प्रवृत्ति का शीघ्र पता लगाने के लिए सभी स्वास्थ्य सुविधाओं से इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी (आईएलआई) और गंभीर तीव्र श्वसन बीमारी (एसएआरआई) के जिलेवार मामलों की नियमित निगरानी और रिपोर्ट करने के लिए भी कहा गया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसके तेजी से बढ़ते प्रसार को देखते हुए JN.1 को एक अलग “रुचि के प्रकार” के रूप में वर्गीकृत किया है, लेकिन कहा है कि यह “कम” वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है.
विश्व संगठन ने कहा कि कोरोना वायरस के जेएन.1 उप-संस्करण को पहले बीए.2.86 उप-संस्करण के हिस्से को ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ (वीओआई) के रूप में वर्गीकृत किया गया था, मूल वंश जिसे VOI के रूप में वर्गीकृत किया गया है.
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Tags: Corona new variants, Covid, COVID 19
FIRST PUBLISHED : January 13, 2024, 23:30 IST


