पड़ोसी मुल्क चीन और पाकिस्तान के साथ हमेशा से हमारे रिश्ते असहज रहे हैं. ये दोनों मुल्क कई बार सांठगांठ कर हमें परेशान करने की कोशिश भी करते हैं. पाकिस्तान तो आदतन वैश्विक और घरेलू दोनों स्तरों पर भारत के मामलों में हस्तक्षेप करता रहा है वहीं चीन भी हमारे लिए अक्सर अड़चनें पैदा करता है. लेकिन, अपना देश भारत भी इन दोनों मुल्कों को मुहतोड़ जवाब देने में इंच भर भी पीछे नहीं रहता. दरअसल, शीत युद्ध की समाप्ति के बाद बीते तीन दशक में दुनिया काफी बदल चुकी है. एक समय भारत का सबसे करीबी दोस्त रहा सोवियत रूस 1990 के दशक में बिखर गया. फिर उसकी जगह रूस ने ली. लेकिन, अंतरराष्ट्रीय पटल पर रूस की वो धमक नहीं रही जो कभी सोवियत रूस की थी. इसका भारत पर भी असर पड़ा और इस कारण भारत को वैश्विक दुनिया में अपनी ताकत बनाए रखने के लिए नए दोस्त तलाशने पड़े.
शीत युद्ध खत्म होने के करीब तीन दशक बाद अब संभवतः भारत को अपना ‘सच्चा महाशक्ति दोस्त’ मिल गया है. यह हर एक मामले में भारत का सबसे अहम साझेदार बनते जा रहा है. कभी रूस पर पूरी तरह से निर्भर भारत की सैन्य ताकत को इस नए दोस्त से काफी सहायता मिल रही है. यह दोस्त आज रूस पर निर्भरता कर करते हुए भारत का प्रमुख सैन्य साझेदार बन गया है.
शीत युद्ध के बाद बदली तस्वीर
वैसे तो शीत युद्ध खत्म होने के बाद संयुक्त राष्ट्र के सभी स्थायी सदस्यों अमेरिका, रूस, इंग्लैंड, फ्रांस और चीन के साथ भारत के रिश्ते काफी बेहतर हुए हैं. अमेरिका के साथ भारत की सैन्य और आर्थिक साझेदारी काफी आगे बढ़ चुकी है. चीन के साथ भी कारोबारी रिश्ते काफी बेहतर हैं लेकिन बीते कुछ सालों तक भारत को रूस की तरह अपना कोई सच्चा साझेदार नहीं मिल रहा था. अब इस साझेदारी की कमी को फ्रांस ने पूरा किया है. आंकड़े और बीते कुछ वर्षों से दोनों देशों के रिश्तों में आई गर्माहट को देखते हुए कहा जा सकता है कि आने वाले समय में भारत का सच्चा महाशक्ति दोस्त फ्रांस ही है.
फ्रांस सच्चा दोस्त कैसे?
इतना पढ़ने के बाद आपको दिमाग में जरूर यह सवाल उठ रहा होगा कि आखिर फ्रांस कैसे भारत का सच्चा दोस्त हो सकता है. दरअसल, भारत और फ्रांस के बीच कुटनीतिक रिश्ते की शुरुआत 1948 में हुई थी. तब से ये दोनों देश रिश्तों के इस डगर पर मीलों आगे बढ़ चुके हैं. इन दोनों देशों के रिश्तों का आधार लोकतंत्र, समानाता और स्वतंत्रता है. इसी आधार पर करीब 26 साल पहले यानी शीत युद्ध खत्म होने के बाद के वर्षों में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत हुई थी. बीते साल 13 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद फ्रांस पहुंचे थे और इस साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ को सेलिब्रेट किया था. उसके साथ ही अगले 25 सालों के लिए दोनों देशों के बीच एक नई साझेदारी की बात कही गई.
गणतंत्र दिवस परेड में फ्रांस
दोनों देशों के बीच रिश्ते की गरमाहट को इस रूप में समझा जा सकता है कि बीते साल फ्रांस के बस्टाइल डे परेड (Bastille Day Parade) में पीएम मोदी पहुंचे थे. इस साल भारत के गणतंत्र दिवस परेड में फांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन पहुंचे. भारत के इस नेशनल डे परेड में छठी बार फ्रांस के राष्ट्राध्यक्ष मुख्य अतिथि बने थे. जो एक रिकॉर्ड है. इससे पहले किसी महाशक्ति देश में सबसे अधिक बार मुख्य अतिथि बनने का रिकॉर्ड ब्रिटेन के पास था.
सामरिक सहयोग
बीते तीन दशक के समय काल को देखें तो भारत के लिए कठिन समय में फ्रांस कई बार सच्चे दोस्त की भूमिका निभाई है. वर्ष 1998 में भारत द्वारा परमाणु परीक्षण करने के बाद लगाए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के वक्त भी हमारा साथ दिया. हमारे परमाणु रिएक्टरों के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों की परवाह किए बिना यूरेनियम ईंधन की आपूर्ति की. इस मुल्क ने भारत के परमाणु परीक्षण करने के अधिकार का समर्थन किया. इसके बाद 2008 में भारत-अमेरिका के हुए परमाणु समझौते में भी इस देश ने बेहद सकारात्मक भूमिका निभाई.
फ्रांसीसी लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान को सिखाया सबक
अगर हम इन दोनों मुल्कों के बीच सामरिक सहयोग पर नजर डालें तो यह सफर 1950 के दशक से शुरू होता है. भारत ने आजादी के शुरुआती दशकों में फ्रांस से दसॉल्ट ऑरेगन लड़ाकू विमान खरीदे थे. फिर 1956 में दसॉल्ट-मिस्ट्री-4 लड़ाकू विमान खरीदे गए. इन विमानों ने 1965 और 1971 में पाकिस्तान के साथ हुए जंग में भारतीय वायुसेना को ताकत दी. इसके बाद 1980 में भारत ने मिराज विमान खरीदे. तब तक भारत के लिए फ्रांस एक भरोसेमंद सैन्य साझेदार बन गया था.
मौजूदा वक्त में सबसे अहम
बीते कुछ वर्षों के दौरान भारत और फ्रांस के रिश्तों की बात करें तो चीजें काफी बदल गई हैं. भारत के एक सबसे अहम सैन्य साझेदार रहे रूस की जगह फ्रांस ने ले ली है. भारत कुछ साल पहले ही फ्रांस के साथ 36 अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा किया था. इन विमानों की अब भारतीय वायुसेना में तैनाती भी हो चुकी है. ये दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में से एक हैं.
चीन को रोकना सबसे अहम उद्देश्य
भारत और फ्रांस की दोस्ती का आधार कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर दोनों देशों की एक जैसी राय है. ये दोनों देश मानते हैं कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना बहुत जरूरी है. यही कारण है दोनों देशों का शीर्ष नेतृत्व वर्षों से लगातार एक दूसरे के संपर्क में है.
अहम साझेदारी
इस वक्त भारत और फ्रांस के बीच कई अहम क्षेत्रों में साझेदारी चल रही है. फ्रांस भारत को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने में सहयोग कर रहा है. वह इसके लिए ईंजन उपलब्ध करवा रहा है. इसके साथ वह मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) में भारत की इंट्री में सहयोग कर रहा है. आप इस साझेदारी का अनुमान इसी से लगा सकते हैं कि वर्ष 2018 से 2022 के बीच फ्रांस भारत के लिए दूसरा सबसे बड़ा हथियार सप्लायर बन गया. उसने नीयत समय में भारत को 36 राफेल लड़ाकू विमानों की भी आपूर्त कर दी. अब आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत दोनों देश कई अहम सैन्य उपकरणों के संयुक्त विकास पर काम कर रहे हैं.
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Tags: France India
FIRST PUBLISHED : January 29, 2024, 13:01 IST


