नई दिल्लीः तृणमूल कांग्रेस पार्टी के नेता शेख शाहजहां के घर पर छापेमारी के दौरान ईडी की टीम पर हमले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के फैसले पर कलकत्ता हाईकोर्ट के जज अभिजीत गंगोपाध्याय ने अपने साथी जज पर गंभीर आरोप लगाए हैं. दरअसल, जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने मामले की जांच पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपने को कहा था, जिसके बाद राज्य सरकार ने यह मामला खंडपीठ के समक्ष उठाया. इसके बाद खंडपीठ ने जस्टिस गंगोपाध्याय के फैसले पर रोक लगा दी.
जस्टिस गंगोपाध्याय ने सीबीआई को जांच सौंपने का दिया था आदेश
इस मामले में आरोप लगाया गया था कि पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनाये गये और फिर उनके आधार पर अनेक बच्चों ने मेडिकल कॉलेजों में दाखिला ले लिया. इस मामले की जांच पश्चिम बंगाल पुलिस कर रही थी. जस्टिस गंगोपाध्याय ने अपने आदेश में कहा था, ‘पश्चिम बंगाल की पुलिस ED टीम पर हमला करने के आरोपी शाहजहां शेख को भी गिरफ़्तार नहीं कर पाई थी. लिहाजा राज्य की पुलिस पर विश्वास नहीं, इसकी जांच तत्काल सीबीआई को सौंप दी जाये.’
खंडपीठ ने जस्टिस गंगोपाध्याय के आदेश पर लगा दिया रोक
ये फैसला आने के तत्काल बाद राज्य सरकार की ओर से ये मामला जस्टिस सोमेन सेन और जस्टिस उदय कुमार की खंडपीठ के समक्ष उठाया गया. इसके बाद खंडपीठ ने जस्टिस गंगोपाध्याय के आदेश पर रोक लगा दी. जस्टिस गंगोपाध्याय ने गुरुवार ने को फिर ये मामला उठाया. उन्होंने अपने आदेश में कहा कि खंडपीठ ने जल्दबाज़ी में उनके आदेश पर रोक लगाई, जबकि इसका कोई कारण नहीं था.
जस्टिस गंगोपाध्याय ने जज अमृता सिन्हा पर लगाया आरोप
उन्होंने कहा कि राज्य की सत्ता में काबिज एक राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया. जस्टिस गंगोपाध्याय यहीं नहीं रुके, उन्होंने अपने आदेश में ये भी लिख दिया कि कुछ दिन पहले कोर्ट की ही एक अन्य जज अमृता सिन्हा ने उन्हें अपने चैंबर में बुलाया था और अभिषेक बनर्जी को डिस्टर्ब नहीं करने और उनसे संबंधित याचिका खारिज करने को कहा था. जस्टिस गंगोपाध्याय ने ये भी लिखा कि उन्हें ये भी पता चला था कि जस्टिस अमृता सिन्हा ने इसकी जानकारी चीफ़ जस्टिस को भी दी थी.

जस्टिस सेन के ट्रांसफर पर भी उठाया सवाल
जस्टिस गंगोपाध्याय ने आदेश में ये भी लिखा कि दो साल पहले जस्टिस सेन का ट्रांसफ़र ओड़िसा हाई कोर्ट हो गया था. बावजूद इसके आज तक उस आदेश का पालन नहीं हुआ. उन्होंने पूछा कि उनके पीछे कौन लोग हैं, कौन सुप्रीम कोर्ट कॉलेज़ियम के ट्रांसफ़र आदेश के बावजूद उसका पालन करने से बचा रहे हैं. जस्टिस गंगोपाध्याय ने इस आदेश की प्रति देश के मुख्य न्यायाधीश के पास भी भेजने का आदेश दिया है. ये अनुरोध किया है कि इन सब तथ्यों को देखा जाये. साथ ही ये भी कहा है कि जस्टिस सेन की खंडपीठ का आदेश ग़ैर क़ानूनी है, लिहाज़ा उसे इग्नोर कर दिया जाये. जस्टिस गंगोपाध्याय पहले भी अपने आदेशों को लेकर चर्चा में रहे हैं. अब इस मामले ने न्यायिक सिस्टम में खलबली मचा दी है.
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Tags: Calcutta high court, Directorate of Enforcement
FIRST PUBLISHED : January 26, 2024, 14:26 IST


