Monday, February 9, 2026
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किशोरावस्‍था में तेजी से बढ़ रहा मानसिक प्रॉब्‍लम, बचपन की परेशानियां बड़ी वजह, शोध में हुआ चौकाने वाला खुलासा


Bullying And Adolescent Mental Health: आमतौर पर हम बच्‍चों के साथ हो रही बत्‍तमीजी या गलत व्‍यवहार को यह सोचकर बर्दाश्‍त कर लेते हैं कि ये तो अभी बच्‍चे हैं. उनकी परेशानियों को हल्‍के में लेकर अपने काम में व्‍यस्‍त हो जाते हैं, लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि बचपन में अगर आपका बच्‍चा बुलिंग के शिकार हो जाए या उनके साथ गलत व्‍यवहार किया जाए, तो इसका असर उनके मेंटल हेल्‍थ पर किस हद तक पड़ सकता है? नेचर मेंटल हेल्‍थ जरनल में हाल ही में एक शोध पब्लिश हुई है जिसमें यह पाया गया है कि बचपन में अगर कोई टीनएजर बुलिंग का शिकार होता है तो इसका उसके मानसिक सेहत पर खतरनाक असर पड़ सकता है और 17 साल की उम्र तक उसे क्‍लीनिकल मेंटल प्रॉब्‍लम से गुजरना पड़ सकता है.

किस तरह की हो सकती है समस्‍या
इस शोध में पाया गया कि जिन किशोरों के साथ बचपन में बुलिंग या गलत व्‍यवहार किया गया, वह या तो डिप्रेशन, हाइपर एक्टिविटी, गुस्‍सा, एंग्‍जायटी, सेल्‍फ हार्म जैसी भावनाएं, सुसाइडल टेंडेंसी से जूझते दिखे या वह नशा करने लगे, लोगों पर से उनका भरोसा उठ गया, हर वक्‍त एक अजीब से डर के साए में जीने लगे या लोगों के साथ गलत तरीके से पेश आने लगे. अगर टीनएज में हुई ऐसी दुर्घटनाओं के बाद मेंटल फिजिकल डिसऑर्डर की इस समस्‍या का इलाज ना हो, तो वे पूरा जीवन इस डिसऑर्डर के साथ जीने लगते हैं.

शोध में क्‍या मिला
बता दें कि यह शोध यूके के करीब 10,000 टीनएज बच्‍चों पर किया गया और इस शोध को पूरा करने में दो दशक का समय लगा. शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन किशोरों को 11 साल की उम्र में धमकाया गया, उनमें 14 साल की उम्र होते होते लोगों से भरोसा उठने लगा और 17 की उम्र तक उन्‍हें क्लिनिकली मेंटल हेल्‍थ प्रॉब्‍लम जैसे हालात से जूझना पड़ा.

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क्‍या कहना है शोधकर्ताओं का
शोधकर्ता डॉ. जॉर्ज स्लाविच का कहना है कि इस शोध से स्कूलों या शिक्षण संस्‍थानों में बच्‍चों के साथ व्‍यवहार या बढ़ते बच्‍चों के निगेटिव मेंटल हेल्‍थ को समझने और इसका निदान निकालने में काफी हद तक मदद मिल सकता है. बता दें कि यह शोध यूसीएलए में मनोचिकित्सा और बायोबिहेवियरल साइंसेज के प्रोफेसर डॉ. जॉर्ज स्लाविच और ग्लासगो विश्वविद्यालय के शोधकर्ता डॉ. दिमित्रिस त्सोमोकोस ने किया था.)

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Tags: Lifestyle, Mental diseases, Mental Health Awareness



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