Subsidy On Fertilizers: खेती-किसानी में खाद का खर्चा सबसे बड़ा बोझ होता है. लेकिन इस बार खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले ही मोदी सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दे दी है. इंटरनेशनल मार्केट में खाद के कच्चे माल की कीमतें भले ही ऊपर-नीचे हो रही हों. लेकिन भारत के किसानों को महंगी डीएपी (DAP) या पोटाश की टेंशन लेने की जरूरत नहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने खरीफ सीजन 2026 के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी यानी NBS दरों को मंजूरी दे दी है.
सरकार का सीधा सा मकसद है कि बुवाई के समय किसानों को खाद की किल्लत न हो और उन्हें वाजिब दामों पर क्वालिटी फर्टिलाइजर्स मिलें. इस बार सरकार ने सब्सिडी का बजट भी काफी बढ़ा दिया है. जिससे वैश्विक महंगाई का असर सीधा हमारे किसान भाइयों की जेब पर न पड़े.
सब्सिडी बजट में 4300 करोड़ से ज्यादा का इजाफा
सरकार ने इस बार खरीफ सीजन के लिए खजाना पूरी तरह खोल दिया है. साल 2026 के खरीफ सीजन के लिए करीब 41,533.81 करोड़ रुपये की भारी-भरकम सब्सिडी राशि को मंजूरी दी गई है. अगर इसकी तुलना पिछले साल यानी खरीफ 2025 से करें. तो सरकार ने इस बार लगभग 4,317 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च करने का फैसला किया है. पिछले साल यह बजट करीब 37,216 करोड़ रुपये था.
- बजट बढ़ने का मतलब है कि अगर विदेशों में खाद महंगी भी होती है. तो उसका बोझ किसानों पर नहीं डाला जाएगा.
- सरकार खुद यह एक्स्ट्रा बोझ उठाएगी जिससे किसानों को पुराने किफायती रेट पर ही खाद मिलती रहे.
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28 तरह की खादों पर मिलेगा सब्सिडी
सरकार केवल यूरिया या डीएपी ही नहीं. बल्कि कुल 28 ग्रेड की पीएंडके (P&K) खादों पर सब्सिडी दे रही है. इसमें एनपीकेएस (NPKS) जैसे महत्वपूर्ण खाद भी शामिल हैं जो मिट्टी की सेहत के लिए जरूरी हैं. यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुकी हैं और 30 सितंबर 2026 तक यानी पूरे खरीफ सीजन के दौरान प्रभावी रहेंगी.
- इंटरनेशनल मार्केट में यूरिया, डीएपी और सल्फर की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिसे देखते हुए यह फैसला लिया गया है.
- खाद कंपनियों को यह सब्सिडी सीधे ट्रांसफर की जाएगी जिससे वे मार्केट में किसानों को सब्सिडी वाले रेट पर खाद उपलब्ध करा सकें.
सही दाम पर खाद की गारंटी
सरकार की इस न्यूट्रीएंट बेस्ड सब्सिडी स्कीम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे खाद की कालाबाजारी और मनमानी कीमतों पर लगाम लगती है. सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि खाद की उपलब्धता स्मूथ बनी रहे और किसी भी राज्य में खाद की कमी की खबर न आए. खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का और दालों की बुवाई के समय किसानों को खाद के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा.
- इस कदम से खेती की लागत कम होगी. जिससे किसानों का शुद्ध मुनाफा बढ़ने की पूरी उम्मीद है.
- सरकार की यह फार्मर फ्रेंडली अप्रोच दिखाती है कि खेती को घाटे का सौदा बनने से रोकने के लिए डिजिटल और आर्थिक दोनों मोर्चों पर काम हो रहा है.
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