Thursday, February 26, 2026
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‘कोई नहीं रोक सकता…’ ताइवान के चुनाव से बौखला गया चीन, डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी की हो गई जीत


हाइलाइट्स

सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) के सदस्य लाई चिंग-ते ने हासिल की जीत.
लाई चिंग-ते की जीत पर चीन ने जताया विरोध.

नई दिल्लीः ताइवान में हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव में सत्तारुढ़ दल के उम्मीदवार लाई चिंग-ते ने जीत हासिल कर ली. हालांकि इस जीत से चीन भड़क गया है. लाई चिंग-ते ताइवान के राष्ट्रपति बनेंगे. समाचार एजेंसी सिन्हुआ की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने कसम खाई है कि वह “ताइवान में अलगाववादी गतिविधियों” को बर्दाश्त नहीं करेगा, जिस पर वह अपना दावा करता है. रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग के ताइवान मामलों के कार्यालय के प्रवक्ता चेन बिनहुआ ने कहा, “हम 1992 की आम सहमति का पालन करेंगे, जो एक-चीन सिद्धांत का प्रतीक है और ‘ताइवान की स्वतंत्रता’ के साथ-साथ विदेशी दखल अंदाजी और अलगाववादी गतिविधियों का दृढ़ता से विरोध करते हैं. “

बिनहुआ ने यह भी कहा कि शनिवार का मतदान ‘चीन को एक’ होने से नहीं रोक सकता. इसके अलावा उन्होंने कहा, “डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी द्वीप पर मुख्यधारा की जनता की राय का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती.” बता दें कि इस चुनाव के नतीजे अगले चार साल तक चीन के साथ उसके संबंधों की दिशा तय करेंगे. चीन के तट से 160 किलोमीटर दूर स्थित इस द्वीप की शांति और स्थिरता दांव पर लगी है. चीन इस पर अपना दावा जताता है और जरूरत पड़ने पर बलपूर्वक इस पर नियंत्रण हासिल करने की बात कह चुका है. चुनाव में अर्थव्यवस्था में गिरावट और महंगा आवास जैसे घरेलू मुद्दे भी हावी रहे.

इस साल के ताइवान चुनाव पर चीन के साथ-साथ अमेरिका की भी पैनी नजर थी. अमेरिका ने शनिवार को लाई चिंग-ते को बधाई दी लेकिन कहा कि वाशिंगटन बीजिंग द्वारा दावा किए गए स्व-शासित द्वीप की स्वतंत्रता का समर्थन नहीं करता है. चीन ने इस मतदान को युद्ध और शांति के बीच चुनाव बताया था. चीन वर्तमान उपराष्ट्रपति और सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) के सदस्य लाई का कड़ा विरोध करता है.

'कोई नहीं रोक सकता...' ताइवान के चुनाव से बौखला गया चीन, डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी की हो गई जीत

लाई और निवर्तमान राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने ताइवान पर चीन के संप्रभुता के दावों को खारिज कर दिया. उन्होंने चीन के साथ बात करने की पेशकश की है. लेकिन चीन उनसे बातचीत करने से इनकार कर चुका है और उन्हें अलगाववादी बताया है. माना जाता है कि चीन राष्ट्रवादी पार्टी कुओमिन्तांग या केएमटी के उम्मीदवार के पक्ष में था.

Tags: China, Taiwan, World news



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