हाइलाइट्स
आमतौर पर समोसा 10वीं सदी में अरब व्यापारियों के जरिए भारत पहुंचा, पहले इसे भूना जाता था बाद में घी-तेल में डीप फ्राई
मुगल दरबार में ये शहंशाह से लेकर दरबारी चाव से खाते थे. शाही रसोई इसे खूब बनाया करती थी
पहले समोसा मीट भरकर ही बनता था लेकिन अब तो आलू का स्टफ हिट है वैसे इसे मटर चाट के साथ खाएं तो बात ही और होगी
गरम गरम समोसा तला जा रहा हो. उसकी गंध नाक में आए तो ऐसा हो ही नहीं सकता कि इसको खाने के लिए जी ना ललचाए. समोसे की बात ही कुछ ऐसी है. एक स्नैक्स के तौर पर ये देशभर में रोज सबसे ज्यादा खाया जाता है. चाहे खुशी का मौका हो या पार्टी या चाय टाइम-हर मौके पर साथ देने के समोसा हाजिर है. मेहमानों का स्वागत भी सबसे ज्यादा समोसे से ही होता है.
क्या आपको मालूम है कि देशभर में रोज 06 करोड़ के आसपास समोसा बेचा और खरीदा जाता है. खाने पीने के बाजार में सबसे बड़ा हिस्सा समोसे का है. बेंगुलुर में पिछले दो तीन सालों में समोसे को लेकर दो स्टार्टअप खुले – समोसा सिंह और समोसा पार्टी. दोनों स्टार्टअप को अच्छी फंडिंग मिली. दोनों अच्छे चल रहे हैं.
समोसा ऐसा व्यंजन भी है, जो सदियों पुराना है. कभी मध्य एशिया से आने वाले व्यापारियों और यात्रियों ने इसका प्रचलन भारत में शुरू किया. वो इसको साथ लेकर आए. मुगल दरबार में ये खानपान की सबसे पसंदीदा चीज बनकर उभरा. जब 17वीं सदी में पुर्तगाली आलू लेकर भारत आए तो फिर समोसे में आलू ऐसा हिट हुआ कि अब समोसे का मतलब ही आलू स्टफ भरा व्यंजन हो गया.
14वीं सदी में भारत आए यूरोपीय यात्री इब्न बबूता ने लिखा, जब मैं भारत आया तो मुहम्मद तुगलक के दरबार में मैने संबुसक (यानि समोसा) को सबसे पसंदीदा पाया. दरबार में बादशाह से लेकर दरबारी तक इस पर शौक फरमाते. ये समोसा मटन कीमा, बादाम, पिश्ता, प्याज, मसालों के मिश्रण को मिलाकर फ्राइ करके बनाया जाता था. फिर इसे आटे के तिकोने लिफाफे में भरकर घी में डीप फ्राई किया जाता था. कहना नहीं होगा कि इब्न बबूता भी इस समोसे का कद्रदान हो गया.
अकबर के दरबार में उनके खास रहे अमीर खुसरो ने बताया कि किस तरह तब दिल्ली के राजसी सत्ता से जुड़े खास लोग समोसे को काफी पसंद करते थे. तब भी समोसे को संबुसक या संबुसका ही बोला जाता था. अबुल फजल ने भी आइन ए अकबरी में बताया कि ये मुगल दरबार के खास पसंदीदा व्यंजनों में था.

10वीं सदी के आसपास मध्य एशिया से निकला समोसा अब भारत का ज्यादा है. अपने देश में तो इसके बगैर जीवन ही अधूरा है. इसकी गजब की लोकप्रियता के चलते ही अब हर साल 05 सितंबर को वर्ल्ड समोसा डे मनाया जाता है. कई सालों से दुनियाभर में इस दिन को मनाकर समोसा की जयजयकार की जाती है. इस दिन समोसा पार्टियां होती हैं, लोग समोसा बनाते हैं और कुछ लोग समोसा बनाना सीखते भी हैं.
फूड हिस्टोरियन कहते हैं कि कैसे पहले जब मध्य एशिया से व्यापारी या यात्री आते थे तो वो ये समोसा रखकर लाते थे. इसे तब वो आग पर भून लिया करते थे. इसको डीप फ्राइ करने का चलन तो बाद में शुरू हुआ.
दुनिया में जितनी लंबी यात्रा समोसे ने की, उतनी शायद ही किसी और व्यंजन ने की हो. जिस तरह इसने खुद को तरह-तरह के स्वाद से जोड़ा, वो भी शायद किसी और डिश के साथ हुआ हो. इसे कई नामों से जाना जाता है. कई सदी पहले की किताबों और दस्तावेजों में इसका जिक्र संबोस्का, संबूसा, संबोसाज के तौर पर हुआ. अब भी इसके कई तरह के नाम हैं, मसलन-सिंघाड़ा, संबसा, चमुका, संबूसाज और न जाने क्या क्या. ये सभी नाम फारसी शब्दावली से आए.

एशिया में समोसा साम्राज्य कैसे फैला
एशिया में “समोसा साम्राज्य” ईरान से फैलना शुरू हुआ. वहां इसका जिक्र दसवीं शताब्दी में लिखी किताबों में हुआ है. ईरानी इतिहासकार अबोलफाजी बेहाकी ने “तारीख ए बेहाकी” में इसका जिक्र किया. हालांकि इसके कुछ और साल पहले पर्सियन कवि इशाक अल मावसिलीकी ने इस पर कविता लिख डाली थी. माना जाता है कि समोसे का जन्म मिस्र में हुआ. वहां से ये लीबिया पहुंचा. फिर मध्य पूर्व. ईरान में ये 16वीं सदी तक बहुत लोकप्रिय था, लेकिन फिर सिमटता चला गया.
अरबी व्यापारी लेकर आए थे
इसे भारत लाने वाले वो अरबी व्यापारी थे, जो मध्यपूर्व से व्यापार के लिए मध्य एशिया और भारत आते थे. ये उन्हीं के साथ यहां आया. संभवतः दसवीं शताब्दी में. मुगलों का भी योगदान था इसे और लजीज और शाही बनाने में. इसके साथ कुछ नए प्रयोग करने में. लेकिन ये तय था कि ईरान और अरब से जो व्यापारी आते थे, समोसा उनका पसंदीदा व्यंजन था. आसानी से बन जाता था. जायकेदार होता था. लेकिन हम जिस समोसे की बात कर रहे हैं, वो मांसाहारी यानि नॉनवेज था. इसे मटन के कीमे और बादाम आदि के साथ मिलाकर बनाया जाता था. तेल में तला जाता था. हालांकि उन दिनों इसे बेक करने का तरीका भी प्रचलित था.
मुगल दरबार में समोसा (फाइल फोटो)
मुगलों ने दी नई शान
मुगलों को समोसे से कुछ खास प्यार था. हर व्यंजन की तरह उनकी शाही रसोई ने समोसे को विकसित किया. अलग-अलग स्वाद और सामग्री वाले. दिल्ली सल्तनत के शायर अमीर खुसरो के अनुसार, “13वीं सदी में ये मुगल दरबार की पसंदीदा डिश थी.” 16वीं सदी में अबुल फजल ने आइन-ए-अकबरी में लिखा, “इसे मुख्य खाने से पहले परोसा जाता था. इसमें कीमे के साथ बादाम, अखरोट, पिस्ता, मसाले मिले होते थे. आकार तिकोना होता था. गेहूं के आटे या मैदा के तिकोने में इसे भरकर बंद करते थे. घी में तलते थे.”
कैसे बना आलू समोसा
समोसे में असली क्रांति तब हुई जब पुर्तगाली 17वीं सदी में आलू लेकर यहां आए. उसकी खेती होने लगी. तब समोसे में आलू, हरी धनिया, मिर्च और मसालों को मिलाकर भरा गया. ये सुपरहिट हो गया. हम सबका प्रिय समोसा आलू वाला ही है. दुनियाभर में इसी समोसे का डंका ज्यादा बज रहा है. अलबत्ता हम भारतीय ये जरूर कह सकते हैं कि समोसे को शाकाहारी बनाने वाले हम ही हैं.

“द ऑक्सफोर्ड कंपेनियन टू फूड” के लेखक एलन डेविडसन लिखते हैं, “दुनियाभर में मिस्र से लेकर जंजीबार तक और मध्य एशिया से चीन तक जितनी तरह के समोसे मिलते हैं, उसमें सबसे बेहतरीन आलू वाला भारतीय समोसा ही है.” करीब एक हजार सालों से इसका आकार यही तिकोना है. वैसे समोसा में जहां पहले मीट भरा होता था, वहीं इसमें हलवा भी भरा गया. मीठे समोसे भी बने. मुगलों के समय में ड्राईफ्रूट्स समोसे भी खूब हिट थे.
समय के साथ स्मार्ट होता समोसा
अब तो खैर भारत में समोसे इतने अलग-अलग तरीके के मिलते हैं कि आप हैरान रह जाएंगे. बल्कि ये भी कहा जा सकता है कि वक्त के साथ जितने स्मार्ट तरीके से कदम समोसे ने बढ़ाए हैं, वो दूसरे व्यंजनों के वश की बात ही नहीं. नूडल्स समोसा, मैकरोनी समोसा, राइस समोसा और ना जाने किस-किस तरह के समोसे. हर तरह का समोसा बाजार में उपलब्ध है. हर शहर में दो-चार रेस्तरां ऐसे जरूर मिल जाएंगे, जिनकी सूची में समोसे के 40-50 रूप शामिल होंगे.
केटी अचाया कि किताब “ए हिस्टोरिकल डिक्शनरी ऑफ इंडियन फूड” कहती है, 1300 में अमीर खुसरो ने इसके बारे में लिखा था कि दिल्ली के मुस्लिम लोगों के बीच ये बहुत लोकप्रिय था. ये मीट, घी, प्याज और तमाम चीजों के साथ बनता था. इसके 50 साल बाद इब्ने बबूता ने इसे समुसक कहा. उसने लिखा ये मीट कीमे, बादाम, अखरोट, पिश्ता, प्याज और मसालों के मिश्रण को भूनने पकाने के बाद आटे के मोटे तिकोने आकार में भरकर घी में तलने के लिए छोड़ दिया जाता था.
हर राज्य का अपना अलग समोसा
वैसे भारत में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरह के समोसे प्रचलित हैं. हैदराबाद में कॉर्न और प्याज के छोटे समोसे मिलेंगे तो बंगाल का सिंघाड़ा मछली भरकर भी बनाया जाता है. कर्नाटक, आंध्र और तमिलनाडु के समोसे कुछ दबे हुए होते हैं. कई जगहों पर केवल ड्राईफूट्स के समोसे मिलेंगे. दिल्ली और पंजाब के लोगों को आलू और पनीर का चटपटा समोसा पसंद आता है.

समोसा वीक
समोसे को कई तरह की चटनी के साथ परोसा जाता है. कई जगह इसे छोले और मटर के साथ मिलाकर नाश्ते के रूप में परोसा जाता है. ये तो तय है कि केवल भारत ही नहीं तकरीबन पूरी दुनिया में समोसा मिल जाएगा. कहीं इसे तलकर बनाया जाता है तो कहीं बेक करके, लेकिन असली समोसा तो वही है जो तलकर करारा-करारा बनाया जाए और जब धनिया की चटनी के साथ प्लेट में सामने आए तो खा बिना रहा ना जाए. समोसे पर इंग्लैंड इस कदर फिदा है कि वहां समोसा वीक मनाया जाता है. तरह-तरह के समोसों की परेड होती जो फिर मुंह के रास्ते पेट तक पहुंचती है.
मटर चाट के साथ खाइए तो यमी यमी
आपने भी समोसा को मटर की चाट के साथ जरूर चखा होगा. कई रेस्टोरेंट इसे खासतौर पर परोसते हैं. इसमें समोसा को मटर की लजीज चाट के साथ परोसा जाता है. समोसे को फोड़ लिया जाता है. और इसमें ऊपर से दही, चटनी, मीठी चटनी, कटा प्याज और नमकीन मिला देते हैं. अब इसे खाइए तो मजा ही आ जाएगा. जीभ में निश्चित तौर पर पानी आ रहा होगा.
कुछ रेस्टोरेंट इसे आलू टमाटर की रसेदार सब्जी के साथ इसी तरह फोड़कर परोसते हैं. कुछ ब्रेड के बीच समोसा लगाकर खाते हैं. तो कई जगह अब बन समोसा जैसा व्यंजन भी खूब चलता है.
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FIRST PUBLISHED : January 24, 2024, 10:55 IST


