Wednesday, February 4, 2026
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खेती नहीं, मुनाफे की मशीन! स्ट्रॉबेरी से कम समय में बंपर कमाई; जानें बेहद आसान तरीका


आज के दौर में स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए कम समय में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल बनकर उभर रही है. बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन अच्छी कीमत तभी मिलती है जब फल बड़े आकार के, गहरे लाल रंग वाले और रसदार हों. कई बार किसान पूरी मेहनत करते हैं, लेकिन सही तकनीक और जानकारी के अभाव में फल छोटे रह जाते हैं या उनका रंग और स्वाद कमजोर हो जाता है.

असल में स्ट्रॉबेरी की खेती में सिर्फ पानी और धूप ही काफी नहीं होती है.बेहतर उत्पादन और शानदार मार्केट रेट पाने के लिए हर छोटे पहलू पर ध्यान देना जरूरी होता है. अगर आप भी अपनी फसल से अधिक मुनाफा चाहते हैं, तो इन जरूरी बातों को जरूर अपनाएं.

1. सही वैराइटी का चुनाव है सबसे बड़ा सीक्रेट

स्ट्रॉबेरी की खेती में सफलता की पहली सीढ़ी है सही किस्म का चयन.हर इलाके की जलवायु अलग होती है, इसलिए उसी के अनुसार वैराइटी चुननी चाहिए. चैंडलर, कैमारोसा, स्वीट चार्ली और विंटर डॉन जैसी उन्नत किस्में बड़े आकार, बेहतर रंग और अच्छे स्वाद के लिए जानी जाती हैं. सही वैराइटी होने से पौधा मजबूत बनता है और फल का वजन भी अच्छा आता है. पौधे हमेशा भरोसेमंद नर्सरी से ही लें और उनकी क्वालिटी जरूर जांचें.

2. मिट्टी की सही तैयारी से बनेगी मजबूत फसल

अच्छी फसल के लिए मिट्टी की तैयारी बेहद जरूरी होती है. स्ट्रॉबेरी के लिए हल्की, भुरभुरी और जैविक पदार्थों से भरपूर मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. मिट्टी का पीएच 5.5 से 6.5 के बीच होना चाहिए। खेत की तैयारी के समय सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, जिससे जड़ें मजबूत होती हैं और पौधा तेजी से बढ़ता है.

3. खाद और पोषण से मिलेगा बड़ा और चमकदार फल

खाद और पोषण को स्ट्रॉबेरी की खेती का सबसे बड़ा सीक्रेट माना जाता है.अच्छे उत्पादन के लिए 19:19:19 एनपीके घुलनशील खाद को 1 से 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर हर 10–15 दिन में ड्रिप या फोलियर स्प्रे के रूप में देना फायदेमंद रहता है. फूल आने से पहले पोटाश की मात्रा बढ़ाने से फल का आकार और वजन बेहतर होता है. वहीं, कैल्शियम नाइट्रेट और बोरॉन का संतुलित छिड़काव फल को चमकदार और एकसार बनाता है.

4. ड्रिप सिंचाई से मिलेगा सही बैलेंस

स्ट्रॉबेरी में सिंचाई का संतुलन बेहद जरूरी होता है. ज्यादा पानी से फल सड़ सकते हैं, जबकि कम पानी से फल छोटे रह जाते हैं.फल बनने के समय नियमित और नियंत्रित सिंचाई करनी चाहिए. ड्रिप सिंचाई इस फसल के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है, क्योंकि इससे मिट्टी में सही नमी बनी रहती है और पानी की बर्बादी भी नहीं होती है.

5. मल्चिंग से बढ़ेगी क्वालिटी और उत्पादन

अच्छे और साफ फलों के लिए मल्चिंग एक जरूरी तकनीक है. पॉली मल्च या भूसे की मल्चिंग से मिट्टी का तापमान नियंत्रित रहता है, नमी लंबे समय तक बनी रहती है और खरपतवार भी कम उगते हैं.इसके साथ ही कीट और रोगों से बचाव के लिए समय-समय पर फफूंद नाशक और कीटनाशक का संतुलित उपयोग करना चाहिए.

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