नई दिल्ली. जब लोग बिना किसी स्वार्थ के ज़रूरतमंदों की मदद करते हैं, तो इसी भाव को परोपकार कहा जाता है. एक अच्छा व्यक्ति वही होता है जो किसी भी आपातकालीन स्थिति में अपने किसी भी निजी स्वार्थ से हटकर दूसरों की मदद करता है. हम सभी ने अपने जीवन में कभी न कभी ऐसे व्यक्ति देखे होंगे, जिन्होंने बिना किसी लाभ के लोगों की सहायता की. भारत में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े चौंकाने वाले हैं, यहां साल 2022 में 4.61 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुई जिनमें 1.68 लाख लोगों ने अपनी जान गवां दी. भारत के विधि आयोग के मुताबिक, अगर समय पर प्राथमिक चिकित्सा दी जाती तो इनमें से 50 फ़ीसदी लोगों की जान बचाई जा सकती थी.
दुर्घटना के बाद पहला घंटा बेहद ही अहम होता है, जिसमें जीवन और मृत्यु के बीच बेहद ही कम अंतर होता है. Golden hour कहे जाने वाली इस अवधि में अगर प्राथमिक चिकित्सा दी जाए, तो दुर्घटना में घायल व्यक्ति की गंभीर स्थिति को कम करने के साथ-साथ उसके बचने की संभावना भी बढ़ाई जा सकती है. लेकिन सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद करने से 75 फ़ीसदी लोग हिचकिचाते थे, क्योंकि उन्हें पुलिस और कानूनी कार्रवाई, और अस्पताल में कई घंटों तक रुकने जैसे झमेलों से डर लगता था. इस तरह की परेशानियों की वजह से ही ज़्यादातर लोग घायलों की मदद करने से हिचकिचाते रहे और सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को समय पर मदद नहीं मिलती थी.
2016 में आया गुड सेमेरिटन कानून
इन चुनौतियों के जवाब में सेवलाइफ़ फ़ाउंडेशन ने साल 2012 में माननीय सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसकी वजह से साल 2016 में गुड सेमेरिटन कानून अस्तित्व में आया. इस कानून को पूरे देश में लागू किया गया. साथ ही, साल 2019 में, मोटर व्हीकल (संशोधित) एक्ट में एक नए सेक्शन 134ए को जोड़ा गया, जिससे गुड सेमेरिटन को आपातकालीन चिकित्सा और अन्य सहायता देने के दौरान किसी तरह की कार्रवाई से सुरक्षा दी जाएगी यानी उन्हें किसी भी तरह से प्रताड़ित नहीं किया जा सकेगा.
यह कानून मदद करने वालों को कानूनी कार्रवाइयों और अन्य कागज़ी प्रक्रियाओं से दूर रखता है और सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद के लिए प्रेरित करता है. ताकि मदद करने वालों को किसी भी कानूनी झमेले या किसी अन्य परेशानी की चिंता न रहे और घायलों को समय रहते मदद मिल सके.
घायलों की मदद करने वालों को प्रोत्साहन
इस कानून के तहत, घायलों की मदद करने वाले नागरिकों के हितों का खास ध्यान रखा जाता है. यह कानून मदद करने की इच्छा रखने वालों को सुरक्षित माहौल देने के लिए लाया गया है. हालांकि, अब भी इस कानून को लेकर लोगों में जागरुकता बढ़ाने की ज़रूरत है. लोगों को इस कानून की जानकारी देने का मतलब है कि इस तरह उन्हें कानूनी परेशानियों और पुलिस की कार्रवाई में उलझे बिना सीधे तौर पर सड़क दुर्घटना में घायलों लोगों की मदद करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है.
अगर इससे मौजूदा मृतकों के आंकड़े में 50 फ़ीसदी कमी भी आती है यानी हर साल 84 हज़ार लोगों की जान बचाई जाती है, तो यह बहुत बड़ी कामयाबी होगी. साथ ही, इससे गुड सेमेरिटन कानून को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाने की प्रेरणा भी मिलेगी. इससे मदद करने की इच्छा रखने वाले लोगों को आगे बढ़कर मदद करने के लिए प्रेरित किया जा सकेगा.
सड़क सुरक्षा अभियान 2024 के दूसरे संस्करण के दौरान, गुड सेमेरिटन कानून के बारे में लोगों को जागरुक करने की कोशिश की जा रही है, ताकि लोगों के मन से कानूनी कार्रवाई या दूसरे किसी डर को दूर किया जा सके. अगर ज़्यादा से ज़्यादा लोग इस कानून को लेकर जागरुक होंगे, तो सड़कों पर दुर्घटना में घायल लोगों के जीवन को बचाने की संभावनाएं भी बढ़ जाएंगी.
सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने और ज़्यादा से ज़्यादा ज़िंदगियों को बचाने की क्षमता रखने वाला यह कानून यकीनन ही हमारी सड़कों को सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है.
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FIRST PUBLISHED : February 15, 2024, 12:25 IST


