Thursday, February 26, 2026
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दिल्ली की जहरीली हवा के लिए कौन जिम्मेदार…प्रदूषण एजेंसियां क्यों नहीं ढूंढ पा रही इसके पीछे की वजह?


नई दिल्ली. दिल्ली-एनसीआर की हवा एक बार फिर से दमघोंटू हो गई है. कोहरे और ठंड के साथ-साथ आग जलाने की घटनाओं ने भी राजधानी की हवा को और जहरीला कर दिया है. पॉल्यूशन कंट्रोल पर काम करने वाली विभिन्न एजेंसियां जैसे सपीसीबी और डीपीसीसी (CPCB and DPCC) के पास भी इस सवाल का जवाब नहीं है. कुलमिलाकर दिल्लीवालों को अगले तीन-चार दिनों तक जहरीली और दमघोंटू हवा से निजात नहीं मिलने जा रही है. इस बीच दिल्ली-एनसीआर में जबरदस्त शीतलहर का प्रकोप भी चलता रहेगा. हवा की रफ्तार भी 10 किलोमीटर से कम रहेगी. झुग्गी-झोपड़ी, कच्ची कॉलोनियों और कॉमर्शियल स्थानों पर आग जलाने की घटनाओं में तेजी आई है. इस कारण भी एयर क्वालिटी इंडेक्स बेहद खराब श्रणी में पहुंच गया है.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, ‘रविवार की तरह सोमवार को भी दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 450 के आस-पास बनी हुई है. खासकर दिल्ली के रिहायशी इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है. खासकर पूसा रोड, अरविंदो मार्ग, नेहरू पैलेस, आनंद विहार में एयर क्वालिटी इंडेक्स बेहद खतराक स्तर पर है. इसको देखते हुए ही दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप-3 भी लागू कर दिया गया है.

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दिल्ली में इस समय तकरीबन 90 लाख वाहन पंजीकृत हैं. (सांकेतिक फोटो/Reuters)

क्यों कम नहीं हो रहा है दिल्ली का पॉल्यूशन लेवल
दिल्ली-एनसीआर में अगले कुछ दिनों तक निर्माण कार्य और मकानों या सड़कों के तोड़फोड़ का काम बंद कर दिया गया है. इसके साथ ही बीएस-3 पेट्रोल और बीएस- 4 मानक वाले डीजल गाड़ियों के संचालन पर पूरी तरह से रोक लग गई है. प्रदूषण की वजह से दिल्लीवालों को गले में खरास, आंखों में जलन के से साथ-साथ सांस संबंधी बीमारियों के साथ जीने की आदत हो गई है. पिछले 7-8 सालों से हर साल दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स खतरनाक स्तर पर पहुंच जाती है.

न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में एनजीटी के एडवायजरी बोर्ड के सदस्य रह चुके अमित कुमार कहते हैं, ‘देखिए दिल्ली में प्रदूषण के लिए वैसे तो कई फैक्टर जिम्मेदार हैं. लेकिन, वाहनों का उत्सर्जन, निर्माण के दौरान उड़ने वाली धूल और खेतों में पराली जलाना या अंगीठी जलाना प्रमुख फैक्टर हैं. इसके साथ ही अधिकारियों का रवैया भी बड़ा कारण है. गाड़ियों और उद्योगों से निकलने वाले जहरीले उत्सर्जन और आग जलाने की घटनाओं से PM-2.5 का लेवल हर साल बढ़ता ही जा रहा है. जबकि, कंस्ट्रक्शन कार्यों में तोड़-फोड़ होने के कारण जो मोटे धूल निकलते हैं उससे PM- 10 को बढ़ाता है. इस लिहाज से देखें तो नवंबर से लेकर फरवरी तक दिल्ल-एनसीआर में निर्माण कार्य पूरी तरह से रोक देना चाहिए. एक तरफ निर्माण कार्य चल रहे होते हैं और दूसरी तरफ ठंड और कोहरा का समय भी आ जाता है.’

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दिल्ली में पिछले एक दशक में वाहनों की संख्या में काफी वृद्धि ने भी प्रदूषण के स्तर को बढ़ा दिया है. (फोटो News18)

ये भी पढ़ें: मजदूरों, पार्ट टाइम काम करने वालों और डिलीवरी बॉय को भी EPF समेत कई फ़ायदे दिलाएगी सरकार, प्लान तैयार

जानकारों का मानना है कि खेतों में आग लगने या पराली जलाने से निकलने वाली धुआं एक बाहरी कारक है, लेकिन दिल्ली में पिछले एक दशक में वाहनों की संख्या में काफी वृद्धि ने भी प्रदूषण के स्तर को बढ़ा दिया है. दिल्ली में इस समय तकरीबन 90 लाख वाहन पंजीकृत हैं. अगर गुरुग्राम, गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा को मिला दें तो इन गाड़ियों की संख्या 2 करोड़ के आस-पास पहुंच सकती है. इसके अलावा दूसरे राज्यों की गाड़ियां हजारों में दिल्ली-एनसीआर में आती है. इन गाड़ियों की वजह से भी दिल्ली में ट्रैफिक लोड बढ़ा है, जिसके कारण हवा प्रदूषित हो गई है.

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