Thursday, March 5, 2026
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नेताजी जरा हट के: मेवात इलाके का चर्चित चेहरा हैं बाबा बालकनाथ, कहां से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर


हाइलाइट्स

बाबा बालकनाथ का राजनीतिक सफर
महंत चांदनाथ के शिष्य हैं बाबा बालकनाथ
वर्ष 2019 में पहली बार अलवर सांसद चुने गए थे

अलवर. राजस्थान विधानसभा चुनाव में इस बार अलवर जिले की तिजारा सीट बेहद चर्चा में है. इसकी बड़ी वजह है यहां के बीजेपी प्रत्याशी बाबा बालकनाथ. वर्तमान में अलवर के सांसद बाबा बालकनाथ नाथ संप्रदाय के महंत चांदनाथ के शिष्य हैं. वे मात्र 6 वर्ष की उम्र में हरियाणा के रोहतक में स्थित बाबा मस्तनाथ मठ अस्थल बोहर के महंत चांदनाथ के शिष्य बन गए थे. महंत चांदनाथ के उत्तराधिकारी बने बाबा बालकनाथ अब उनकी राजनीतिक विरासत भी संभाल चुके हैं.

बाबा बालकनाथ का तिजारा से नामांकन फार्म भरवाने के लिए उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यानाथ आए थे. सीएम योगी ने यहां उस दिन चुनावी सभा को संबोधित भी किया था. बाबा बालकनाथ ने अपना पहला चुनाव बीजेपी से वर्ष 2019 में अलवर लोकसभा क्षेत्र से लड़ा था और कांग्रेस के दिग्गज नेता एवं अलवर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य भंवर जितेन्द्र सिंह को हराकर विजयी हुए थे. महज 38 साल के बाबा बालकनाथ आज मेवात इलाके के बड़े हिन्दू नेता के रूप में पहचान रखते हैं.

महंत चांदनाथ के बेदह करीब रहे हैं बाबा बालकनाथ
बाबा बालकनाथ मूलतया अलवर जिले के बहरोड़ क्षेत्र के मोहराणा गांव के रहने वाले हैं. बाबा बालकनाथ करीब पंद्रह साल तक हनुमानगढ़ जिले में स्थित आश्रम में रहे हैं. वे महंत चांदनाथ के नजदीकी रहे हैं. महंत चांदनाथ भी शुरुआती दिनों में हनुमानगढ़ स्थित इसी आश्रम में रहते थे. महंत चांदनाथ अलवर के बहरोड़ से वर्ष 2004 में उपचुनाव में विधायक चुने गए थे.

महंत चांदनाथ ने किया था अलवर लोकसभा चुनाव का किला फतह
बीजेपी ने बाद में मेवात के अलवर इलाके में नाथ संप्रदाय के प्रभाव को देखते हुए 2014 में लोकसभा चुनाव में चांदनाथ को मैदान में उतारा था. महंत चांदनाथ कांग्रेस प्रत्याशी जितेन्द्र सिंह को हराकर सांसद बने. लेकिन बाद में लंबी बीमारी के चलते सांसद रहते हुए महंत चांदनाथ का निधन हो गया था. उसके बाद हुए लोकसभा के उपचुनाव में बीजेपी ने यहां से जसंवत सिंह चुनाव मैदान में उतारा. उनका मुकाबला पूर्व सांसद डॉ. करण सिंह हुआ लेकिन वे जीत नहीं पाए. इससे अलवर लोकसभा की सीट बीजेपी के हाथ से निकल गई.

बीजेपी ने खोई सीट को वापस पाने के लिए खेला था बालकनाथ पर दांव
इस पर बीजेपी इलाके में खोई हुई अपनी सीट वापस पाने के लिए महंत चांदनाथ के उत्तराधिकारी बाबा बालकनाथ को वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में मैदान में उतारा. बाबा बालकनाथ चुनाव में विजयी हुए. वहीं से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ. उसके बाद बीजेपी ने इस बार अल्पसंख्यक बहुल तिजारा सीट को हथियाने के लिए यहां बाबा बालकनाथ पर दांव खेला है. बाबा बालकनाथ भी कई बार अपने विवादित बोल के कारण चर्चा में रह चुके हैं.

सामाजिक सरोकारों के लिए प्रसिद्ध है मठ
जानकारों की मानें तो आठवीं शताब्दी में हरियाणा के रोहतक में स्थापित और करीब 150 एकड़ क्षेत्रफल में फैला श्री बाबा मस्तनाथ मठ आध्यात्मिक, धर्मार्थ चिकित्सा और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए जगप्रसिद्ध है. महंत चांदनाथ के उत्तराधिकारी बाबा बालकनाथ बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं. उनके सानिध्य में वर्तमान में देशभर में दो दर्जन से अधिक शैक्षणिक संस्थानों, चिकित्सालयों, गौशालाओं और धर्मशालाओं का संचालन किया जा रहा है.

संस्कृत, राजस्थानी और पंजाबी भाषा के भी अच्छे जानकार हैं बाबा
नाथ सम्प्रदाय के सबसे बड़े अस्थल बोहर मठ के आठवें मठाधीश के रूप में दायित्व संभाल रहे बाबा बालकनाथ संस्कृत, हिंदी, राजस्थानी और पंजाबी भाषा के अच्छे जानकार माने जाते हैं. वे अब अपने गुरुजी की राजनीतिक विरासत को बखूबी संभाल रहे हैं. इस बार पार्टी ने उनके जरिए तिजारा जैसे उलझे हुए राजनीतिक समीकरणों वाली सीट पर अपना राजनीतिक वर्चस्व स्थापित करना चाह रही है. बीजेपी का यह दांव कितना सफल होगा यह तो मतगणना के बाद ही सामने आ पाएगा. बहरहाल यह सीट बेहद चर्चा में है.

Tags: Alwar News, Jaipur news, Rajasthan bjp, Rajasthan elections, Rajasthan news, Rajasthan Politics



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