नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है, जो आजीवन कारावास की सजा मिलने के बाद पैरोल लेकर फरार हो गया था. दिल्ली पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए लोकसभा चुनाव में मतदाता कार्ड बनाने वाले चुनाव अधिकारी बनकर 500 घरों में दस्तक दी और आरोपी को मुंबई के गोवंडी इलाके से आखिरकार धर दबोचा.
बताया जा रहा है कि आरोपी मुश्ताक कोविड में मिली छूट का फायदा उठाकर पैरोल में जेल से बाहर आया था और उसके बाद शादी करके मुंबई में जाकर छिप गया था, जहां पर कड़ाई का काम करने लगा और फिर वापस जेल में नहीं गया. जब शख्स जेल में नहीं पहुंचा तो क्राइम ब्रांच की टीम को सूचना मिली कि वह मुंबई के एक स्लम एरिया गोवंडी में रहता है. ये एक मुस्लिम बाहुल्य इलाका है, जहां उसे तलाशना आसान नहीं था.
पुलिस ने आरोपी को पकड़ने का निकाला नायाब तरीका
क्राइम ब्रांच के मुताबिक, कोई ऐसा एड्रेस नहीं था, जहां उसे तलाशा जा सके. इसलिए टीम ने चुनाव अधिकारी के रूप में काम किया और आगामी लोकसभा चुनावों के लिए मतदाता कार्ड बनाने के लिए 500 से अधिक घरों में गए. क्राइम ब्रांच ने मुंबई में पक्का घर और वोटर लिस्ट में नाम डालने का लालच दिया था, जिसके बाद इस टीम के जाल में वह आरोपी फंस गया. मुम्बई में पक्के घर मिलने और वोटर बनने का लालच देकर इन्वेस्टिगेशन शुरू की गई. टीम ने लगातार घूमते रहने के बाद इस आरोपी को पकड़ लिया, हालांकि आरोपी ने दाढ़ी और मूंछ मुंडवाकर अपनी पहचान बदल ली थी.
क्या था आरोप
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के मुताबिक आरोपी जामिया नगर थाने में हत्या के मामले में पिछले 3 साल से फरार चल रहा था, जिसे आजीवन कारावास की सजा मिली लेकिन पैरोल जंपर को क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल टीम ने गिरफ्तार किया. पैरोल जंपर का पता लगाने के लिए क्राइम ब्रांच की टीम ने आगामी लोकसभा चुनावों के लिए मतदाता कार्ड बनाने के लिए चुनाव अधिकारी के रूप में काम किया था ताकि उसका सुराग हासिल हो. क्राइम ब्रांच के मुताबिक मुश्ताक के ऊपर साल 2013 में आईपीसी 302/201/34 के तहत थाना जामिया नगर में मामला दर्ज हुआ था. इस मामले में वह आजीवन कारावास की सजा काट रहा था और 15 मई 2021 को कोविड-19 महामारी के दौरान पैरोल पर छूटा था. उसे 90 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करना था, लेकिन वह तब से अपनी गिरफ्तारी से बच रहा था.
क्राइम ब्रांच के मुताबिक, आरोपी मोहम्मद मुस्ताक और उसके दो दोस्तों का एक चाय की दुकान पर झगड़ा हुआ था और शिकायतकर्ता के बेटे ने इसकी जानकारी दुकान के मालिक को दी, जिससे आरोपी नाराज हो गया और शिकायतकर्ता को धमकाया. अगले दिन आरोपियों ने शिकायतकर्ता के बेटे को बुलाया और कुछ देर बाद शिकायतकर्ता को पता चला कि कुछ नीचे गिर गया है. जब शिकायतकर्ता अपने घर से बाहर आया, तो उसने अपने बेटे को खून से लथपथ पाया, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई. शिकायतकर्ता ने आगे आरोप लगाया कि तीनों आरोपियों ने रंजिश के चलते उसके बेटे को 5वीं मंजिल से फेंक दिया. इसमें मामला दर्ज किया गया था. ट्रायल पूरा होने के बाद आरोपी मोहम्मद मुस्ताक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. उसे 15 मई 2021 को कोविड-19 महामारी के दौरान 90 दिनों के लिए आपातकालीन पैरोल पर जेल से रिहा किया गया था, लेकिन उसने आत्मसमर्पण नहीं किया और तब से फरार था.
क्राइम ब्रांच के मुताबिक, 6 अप्रैल को एसआई रितेश कुमार को दोषी मोहम्मद मुस्ताक के ठिकाने के बारे में गुप्त सूचना मिली कि वह वर्तमान में मुंबई में रह रहा है. गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए एसआई रितेश कुमार, जय कुमार और राजीव की छापेमारी पार्टी का गठन किया गया. तकनीकी विश्लेषण और मैनुअल इंटेलिजेंस की मदद से टीम ने घनी आबादी वाले स्लम एरिया गोवंडी, मुंबई से पैरोल जंपर का पता लगाया. पूछताछ के दौरान दोषी मो. मुस्ताक ने खुलासा किया कि आपातकालीन पैरोल पर रिहा होने के बाद वह अपने गांव गया और शादी कर ली. वहां उसके पास आय का कोई स्रोत नहीं था और पुलिस भी उसकी तलाश कर रही थी, इसलिए वह मुंबई चला गया और वहां काम करने लगा. उसे संबंधित जेल अधिकारियों के समक्ष पेश किया जा रहा है.
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Tags: Crime News, Delhi news
FIRST PUBLISHED : April 11, 2024, 14:05 IST


