बांग्लादेश में जारी प्रदर्शन के बीच पीएम शेख हसीना इस्तीफा देकर देश से जा चुकी हैं। इसके साथ ही राजधानी ढाका में बांग्लादेशी सेना ने कमान अपने हाथों में ले ली है। हसीना का विमान दिल्ली के करीब भारतीय वायुसेना के एयर बेस पर उतरा, जिसके बाद भारतीय एनएसए अजीत डोभाल ने उनसे मुलाकात की। 76 वर्षीय शेख हसीना के खिलाफ लगातार उग्र प्रदर्शन हो रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने कर्फ्यू की परवाह किए बिना ही पूरे देश में अपने प्रदर्शनों को जारी रखा। यह प्रदर्शन इतने हिंसक और उग्र हो गए कि हसीना के जाने के कुछ घंटे के अंदर ही प्रदर्शन कारी प्रधानमंत्री आवास में घुस गए और लूटपाट करने लगे। उन्होंने देश के राष्ट्रपति माने जाने वाले शेख मुजीब की मूर्ति पर भी हथौडों से मार कर खंडित कर दिया। आवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं की पीट- पीट कर बेरहमी से हत्या कर दी गई।
इसके बाद बांग्लादेशी आर्मी चीफ ने टीवी पर आकर ऐलान किया कि हसीना जा चुकी है और अब अंतरिम सरकार का गठन किया जाएगा, जो देश को चलाएगी। हसीना लगातार तीसरी बार सत्ता में वापस आईं थी। विपक्ष ने उन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने चुनाव में धांधली की है। हालांकि हसीना के करीबी सूत्रों का कहना है इस तरह के हालातों के लिए चीन और पाकिस्तान का षड़यंत्र है। यह देश बांग्लादेश में इस्लामिक शासन चाहते हैं और हसीना द्वारा जो एक लोकतांत्रिक शासन की स्थापना की गई है उसको खत्म करना चाहते हैं।
भारत ने कहा था यह बांग्लादेश का आंतरिक मसला लेकिन अब क्या..
भारत लगातार पड़ोसी देश में चल रही घटनाओं पर नजर बनाए हुए था। पीएम हसीना का विमान भारतीय राजधानी दिल्ली के नजदीक उतरा तो वैसे ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार उनसे मिलने के लिए पहुंचे। इधर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पीएम मोदी को हालातों के बारे में जानकारी दी। भारत ने पहले ही अपने नागरिकों से बांग्लादेश जाने में कोताही बरतने के लिए कहा था और अब जबकि वहां के हालात खराब हो चुके हैं भारत की तरफ से सीमाओं पर हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। शेख हसीना को भारत के समर्थक के तौर पर देखा जाता है और वह लगातार भारत और बांग्लादेश के मजबूत रिश्तों के लिए काम भी करती रही हैं। चीन और पाकिस्तान के साथ लगातार बार्डर पर चलती तनातनी के बीच भारत और बांग्लादेश एक शांति वाली सीमा को साझा करते हैं। दोनों ही देशों के बीच में एक दोस्ताना व्यवहार रहा है।
भारतीय विदेश मंत्रालय कि तरफ से इन प्रदर्शनों पर कहा गया था कि बांग्लादेश हमारा मित्र और पड़ोसी देश है वहां पर स्थिरता हमारे लिए बहुते महत्वपूर्ण है अगर वहां पर कोई दिक्कत आती है तो वहां से आने वाले शरणार्थी हमारे लिए संकट पैदा कर सकते हैं। भारत विरोधी ताकतें वहां पर अपनी जड़ें जमा सकता है। इसके साथ ही बांग्लादेश की भारत से होने वाले व्यापार को भी इससे काफी हद तक नुकसान होगा।
बांग्लादेश कि निवर्तमान प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत और चीन के बीच के संबंधों को बखूबी संभाला हुआ था। लेकिन उनके जाने के बाद पूर्व पीएम खालिदा जिया को जेल से आजाद करा दिया गया है। खालिदा जिया को भारत का कट्टर और चीन का समर्थक माना जाता है। अगर बांग्लादेश में खालिदा जिया की प्रधानमंत्री के तौर पर वापसी होती है तो यह भारत के लिए खतरे की घंटी साबित होगा।
भारत के लिए आगे कि राह क्या..
भारत हमेशा से ही बांग्लादेश और पश्चिमी देशों के बीच में एक मध्यस्थ की भूमिका में रहा है। जनवरी में बांग्लादेश में हुए चुनावों को लेकर पश्चिमी देशों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी लेकिन भारत के शेख हसीना के चुनाव को समर्थन देने के बाद पश्चिमी देशों के द्वारा भी इसे स्वीकार कर लिया गया था। इस मामले के जानकार लोगों के अनुसार,ढाका में चाहे कोई भी सत्ता में रहे उसे भारत के बेहतर संबंध रखने ही होंगे। क्योंकि इन दोनों पड़ोसी देशों के बीच के बेहतर संबंध ही दोनों देशों की जनता को बेहतर जीवन दे सकते हैं।
भारत और बांग्लादेश के बीच बर्षों से चले आ रहे पानी को लेकर विवाद इस समय पर नया रूप ले सकता है क्योंकि शेख हसीना इस मु्द्दें को भारत के साथ शांति पूर्वक और धैर्य के साथ निपटाना चाहती थीं लेकिन नई सरकार इसकों कैसे देखती है यह देखने वाली बात होगी। वहीं तीस्ता नदी प्रोजेक्ट जो शेख हसीना के प्रधानमंत्री रहते भारत को मिलना लगभग तय था उसको लेकर भी अब अनिश्चितता का दौर शुरू हो चुका है।
जानकार लोगों के अनुसार, भारत और बांग्लादेश के संबंध अब इस बात पर निर्भर करेंगे कि बांग्लादेशी आर्मी इन मुद्दों पर कैसा रुख अपनाती है।
भारत ने पड़ोसी देश में मची इस उथल-पुथल पर अपनी आंखे बनाई रखी हैं साथ ही भारत को यह भी देखना होगा कि ढाका में कोई ऐसी सरकार बैठे जो भारत के साथ मित्रवत संबंध रखने की पक्षधर हो, साथ ही साथ भारत को अपने यह भी देखना होगा की और देश बांग्लादेश में उत्पन्न इस राजनीतिक उठापटक को कैसे देखते हैं।


