Ram Mandir Ayodhya: अयोध्या में आज भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा होगी. लंबी लड़ाई के बाद साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्ष के हक में फैसला दिया और मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ. उच्चतम न्यायालय में दोनों पक्ष ने तमाम दस्तावेज और सबूत पेश किये. सैकड़ों लोगों की गवाही हुई. एक गवाही मशहूर पुरातत्वविद केके मोहम्मद की भी थी. ASI के पूर्व अफसर केके मोहम्मद, अयोध्या में विवादित स्थल की पहली बार खुदाई करने वाली टीम का हिस्सा थे. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बाकायदा मोहम्मद द्वारा पेश किए गए साक्ष्य को कोट किया.
48 साल पहले बाबरी की खुदाई
केके मोहम्मद बताते हैं कि साल 1976-77 में मैं पहली बार अयोध्या में विवादित स्थल पर खुदाई करने के लिए गया. हमारा स्टैंडर्ड प्रोसीजर है कि जहां खुदाई करनी है, पहले उस जगह का सर्वे करेंगे. पूरे एरिया को बाहर से देखेंगे और फिर तय करेंगे कि इसके नीचे कुछ हो सकता है या नहीं.
द लल्लनटॉप को दिये एक इंटरव्यू में मोहम्मद (KK Muhammed ASI) कहते हैं कि उस जमाने में टेक्नोलॉजी इतनी डेवलप नहीं हो पाई थी. ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) सिस्टम जैसी चीज नहीं थी. इसलिए हम लोग सारे दस्तावेज और किताबों का अध्ययन करके जाते थे. फिर मौके पर उसको कोरिलेट करने की कोशिश करते थे.
विवादित बाबरी ढांचा, जो 1992 में ढहा दिया गया था.
मस्जिद पर लटका था ताला
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पूर्व अफसर मोहम्मद बताते हैं कि उन दिनों विवादित स्थल पर बाबरी मस्जिद हुआ करती थी. उसमें ताला लगा हुआ था और एक पुलिस वाला तैनात था. 1976-77 में जन्मभूमि का मामला इतना गरम नहीं था. मैंने पुलिस वाले से कहा कि हम लोग विद्यार्थी हैं और शोध करने आए हैं. उन्होंने हमें अंदर जाने की इजाजत दे दी.
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ASI की टीम ने पहली बार बाबरी के अंदर क्या देखा?
केके मोहम्मद (KK Muhammed) बताते हैं कि जब हम विवादित स्थल के अंदर गए तो देखा कि बाबरी मस्जिद के सारे पिलर मंदिर के पिलर थे. वह कहते हैं कि हमें इस चीज की बकायदा ट्रेनिंग मिलती है कि अगर किसी चीज को दिखा दिया जाए तो बता सकते हैं कि वह किस काल की, किसके समय की और क्या है. बिना किसी साइंटिफिक टेस्टिंग के भी बता पाएंगे कि कोई चीज 12वीं शताब्दी की है या 13वीं शताब्दी की या किस शासक के काल की.
केके मोहम्मद (लाल घेरे में)
‘मस्जिद में सारे मंदिर के पिलर थे’
बकौल मोहम्मद, किसी इमारत की डिजाइन, उसकी निर्माण शैली और उसमें यूज मैटेरियल को देखकर यह बताया जा सकता है कि वह किस काल की है. इसको ”स्टाइलिस्टिक डेटिंग” कहा जाता है. केके मोहम्मद कहते हैं कि बाबरी मस्जिद में 11वीं और 12वीं शताब्दी के मंदिरों के पिलर मस्जिद यूज किये गए थे. यह पहली नजर में ही मालूम चल गया.
कौन हैं केके मोहम्मद?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पूर्व अफसर केके मोहम्मद 1976 में बीबी लाल की उस टीम का हिस्सा थे, जिसने पहली बार बाबरी मस्जिद की खुदाई की थी. मोहम्मद, साल 2012 में एएसआई के उत्तरी जोन के क्षेत्रीय निदेशक के पद रिटायर हुए. एक इंटरव्यू में बताते हैं कि 1976 में मैं आर्कियोलॉजिस्ट कॉलेज से पीजी डिप्लोमा की पढ़ाई कर रहा था और बीबी लाल की टीम के साथ विवादित स्थल पर गया.

कांग्रेस नेता की पत्नी भी टीम में थीं
अयोध्या में विवादित स्थल (Ayodhya News) की पहली बार खुदाई करने वाली टीम में कांग्रेस नेता जयराम रमेश की पत्नी जयश्री रामनाथन भी शामिल थीं. केके मोहम्मद कहते हैं कि बाबरी के अंदर खुदाई में हमें जो चीजें मिली थीं, जिस निष्कर्ष पर पहुंचे थे, बीबी लाल (BB Lal, ASI) उसको कभी पब्लिश नहीं करना चाहते थे. उनका मानना था कि इससे सांप्रदायिक तनाव फैलेगा और वैमनष्य बढ़ेगा, लेकिन मैंने सारे तथ्य सार्वजनिक किये. रिपोर्ट लिखी.
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मिलीं जान से मारने की धमकियां
केके मोहम्मद (KK Muhammed) कहते हैं कि जब मैंने तमाम तथ्य रखे और कहा कि बाबरी मस्जिद, मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी और वहां मंदिर के सबूत हैं तो मुझे जान से मारने की धमकियां मिलने लगी. एक वर्ग पीछे पड़ गया. इन दोनों केरल के कोझिकोड में रहने वाले केके मोहम्मद कहते हैं कि आज भी उन्हें धमकियां मिलती रहती हैं.
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FIRST PUBLISHED : January 22, 2024, 08:23 IST


