बांग्लादेश में तख्तापलट और पूर्व पीएम शेख हसीना के भारत आकर शरण लेने के बाद तनावपूर्ण शांति है। लेकिन 15 सालों से सत्ता में रही अवामी लीग के खिलाफ अब भी प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं। गुरुवार को 15 अगस्त के मौके पर अवामी लीग के नेता ढाका में स्थित धानमंडी के कमरा नंबर 32 में जाना चाहते थे, जहां शेख मुजीबर रहमान की हत्या हुई थी। आज के दिन ही उन्हें परिवार के 4 लोगों समेत कत्ल कर दिया गया था। ऐसे में इस दिन को बांग्लादेश में अब तक शहीदी दिवस के तौर पर मनाया जाता रहा है। लेकिन अब कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी और बांग्लादेश नेशनल पार्टी के सत्ता के करीब पहुंचने के बाद माहौल खराब है।
मोहम्मद यूनुस की लीडरशिप वाली अंतरिम सरकार ने पहले तो शेख मुजीब के शहीदी दिवस पर होने वाली छुट्टी को रद्द कर दिया। इसके अलावा गुरुवार को जब नेता वहां श्रद्धांजलि देने पहुंचने वाले थे तो उनका रास्ता ही रोक लिया गया। बड़ी संख्या में वहां प्रदर्शनकारी डट गए और अवामी लीग के नेताओं को धानमंडी के कमरा नंबर 32 तक नहीं जाने दिया गया। अब तक किसी भी नेता के वहां पहुंचने की खबर नहीं है। ढाका ट्रिब्यून की खबर के मुताबिक ये लोग आधी रात से ही यहां डेटा डाले बैठे थे ताकि अवामी लीग के नेता यहां न आ सकें।
यहां बड़ी संख्या में पुलिस और सेना के जवानों को भी तैनात किया गया है। एक तरफ अवामी लीग के नेताओं को करीब एक सप्ताह तक खोज-खोजकर मारा गया और उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया तो वहीं अब मुजीब की विरासत को भी चोट पहुंचाई जा रही है। शेख मुजीबुर रहमान को बांग्लादेश का निर्माता माना जाता है। लेकिन बंग बंधु की मूर्ति तोड़ने से लेकर श्रद्धांजलि देने से भी रोकने की घटनाओं ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बांग्लादेश के राष्ट्रवादी मानते हैं कि यह एक ऐसा दौर है, जिसमें मुल्क की नींव रखने वाले शेख मुजीब को भी बख्शा नहीं जा रहा।
धानमंडी रोड पर एक वाहन को भी बुरी तरह से तोड़ दिया गया। प्रदर्शनकारियों को शक था कि इस कार में अवामी लीग के नेता सवार हैं। बंगबंधु के नाम पर धानमंडी 32 में एक संग्रहालय बना था। यहीं पर उनकी हत्या हुई थी। इसलिए यह स्मारक भी था। लेकिन तख्तापलट के दौरान हुई हिंसा में इसे बख्शा नहीं गया। मौजूदा स्थिति यह है कि स्मारक का अस्तित्व ही एक तरह से समाप्त हो गया है।


