मुंबई. केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने महाराष्ट्र में मराठों को आरक्षण नहीं मिल जाने तक उन्हें ओबीसी समुदाय के सारे लाभ देने के फैसले का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि वह महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले से सहमत नहीं हैं और इससे राज्य में अशांति फैलेगी.
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने राणे सोशल मीडिया पर प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि वह राज्य सरकार के फैसले को तथा आरक्षण के संबंध में मराठा समुदाय को उसके द्वारा दिए गए आश्वासन को मंजूर नहीं करते हैं. उन्होंने लिखा, ‘इससे ऐतिहासिक विरासत वाले मराठा समुदाय का दमन होगा और यह अन्य पिछड़े समुदायों में भी अतिक्रमण होगा. इससे राज्य में अशांति फैलेगी.’ इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह सोमवार को भी इस मुद्दे पर बोलेंगे.
सीएम शिंदे ने मराठों को ओबीसी जैसे लाभ का किया वादा
दरअसल मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा उनकी मांगें मान लिये जाने के बाद शनिवार को अपना अनिश्चितकालीन उपवास खत्म कर दिया था. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने घोषणा की थी कि जबतक मराठों को आरक्षण नहीं मिल जाता, तबतक उन्हें ओबीसी को प्राप्त सभी लाभ मिलेंगे.
ये भी पढ़ें- ‘जब तक मिलेगा नहीं तब तक…’ मनोज जारंगे के फिर बदले सुर, मराठा आरक्षण को लेकर कही ये बात
शिंदे सरकार के इस फैसले पर राज्य के कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल ने भी नाराजगी जताई है और अन्य पिछड़ा वर्ग में ‘पिछले दरवाजे से मराठों के प्रवेश’ पर सवाल उठाया है. भुजबल ने रविवार को कहा कि मराठा आरक्षण के संबंध में राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ एक फरवरी को विधायकों, सांसदों और तहसीलदारों के आवासों के बाहर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा. भुजबल ने रविवार को अपने आधिकारिक आवास पर एक बैठक की, जिसमें ओबीसी विधायकों, नेताओं और अन्य लोगों ने हिस्सा लिया.
भुजबल निकालेंगे ‘एल्गान रैली’
भुजबल ने इस बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘ हम राज्य सरकार के मौजूदा फैसले के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए विधायकों, सांसदों और तहसीलदारों के आवासों के बाहर इकट्ठा होंगे. इस फैसले के जरिए मराठा समुदाय को आरक्षण लाभ देने के लिए अवैध तरीका अपनाया जा रहा है. हम इस तरह के फैसलों के खिलाफ ओबीसी को एकजुट करने के लिए मराठवाड़ा से एक ‘एल्गार रैली’ भी निकालेंगे.’
भुजबल ने कहा, ‘ राज्य में ओबीसी को मूर्ख बनाने के लिए कदम उठाए गए हैं. जब कानून में रिश्तेदारों की स्पष्ट परिभाषा बताई गई है तो अवैध रूप से इसमें बदलाव क्यों किए गए? ओबीसी में मराठों को शामिल करने से मौजूदा पिछड़ा वर्ग बाहर हो जाएगा और वे आरक्षण लाभ से वंचित हो जाएंगे.’

बता दें कि कृषक समुदाय ‘कुनबी’ ओबीसी के अंतर्गत आता है और जरांगे भी सभी मराठों के लिए कुनबी प्रमाणपत्र मांग रहे है. जरांगे मराठों के वास्ते आरक्षण की मांग को लेकर अगस्त से आंदोलन कर रहे थे. हालांकि उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी ओबीसी की चिंताएं दूर करने का प्रयास करते हुए कहा है कि मराठों को बिना सबूत कुनबी प्रमाणपत्र नहीं दिया जाएगा.
.
Tags: Eknath Shinde, Maratha Reservation, Narayan Rane
FIRST PUBLISHED : January 29, 2024, 12:00 IST


