Tuesday, February 10, 2026
Google search engine
Homeदेशवेंटिलेटर पर आई राजस्थान रोडवेज, फौरन संजीवनी नहीं मिली तो तोड़ सकती...

वेंटिलेटर पर आई राजस्थान रोडवेज, फौरन संजीवनी नहीं मिली तो तोड़ सकती है दम! जानें अंदरुनी ताजा हालात


जयपुर. राजस्थान में नई सरकार बनने और नए परिवहन मंत्री मिलने के बाद भी रोडवेज के हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है. रोडवेज के सुधार के लिए केवल बैठकों का दौर चल रहा है. नए नए सुझाव दिए जा रहे हैं. इनमें बसों के संचालन पर जोर कम है. रोडवेज की संपत्तियों से आय बढ़ाने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है. कहा जा रहा है कि आने वाले 90 दिनों में 300 से ज्यादा बसें ले ली जाएंगी. हालांकि अभी नई बसें आ नहीं रही है और वर्तमान में बसों का बेड़ा लगातार कम होता जा रहा है.

हालात यहां तक आ पहुंचे हैं कि रोडवेज के बेड़े की कुल करीब तीन हजार बसों में से दो तिहाई कंडम हो गई है. रोडवेज के पास अब महज 1 हजार बसें ही बची है जो मानको को पूरा करती है. शेष दो हजार बसों को प्रदेश की सड़कों पर दौड़ाया जरुर जा रहा है लेकिन वे किसी खतरे से कम नहीं है. राजस्थान रोडवेज की हालत फिलहाल ऐसी है कि उसे तत्काल संजीवनी की जरूरत है. लगभग सभी बसें वेंटिलेटर पर जा चुकी हैं.

हालात ये हैं कि परिवहन मंत्री को बीच हाई-वे पर टूटी हुई बसें मिलती है जिन्हें वो रूकवाकर ठीक करवाने के निर्देश देते हैं. राजस्थान रोडवेज के पास लगभग 3 हजार बसों का बेड़ा है. इनमें 2 हजार के करीब अपने नॉर्म्स को पूरा कर चुकी है और कंडम श्रेणी के दायरे में आ गई हैं. फिर भी इन बसों को जैसे तैसे धकमपेली कर प्रदेश की सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है. रोडवेज एमडी कहते हैं कि आने वाले 90 से 100 दिनों में 300 से ज्यादा बसें ले ली जाएंगी लेकिन ये मामला लंबा खींचता जा रहा है.

एसीएस लगातार रोडवेज को लेकर बैठक ले रही हैं. बैठकों में हो रही चर्चाओं के मुताबिक विभाग का ज्यादा जोर रोडवेज की संपत्तियों से कमाई करने का है और बसों के संचालन को लेकर रवैया ढीला ढाला है. हालांकि नई नई योजनाओं के जरिए रोडवेज को उबारने की कोशिश की जा रही है. लेकिन उनके नतीजे सार्थक नहीं निकल पा रहे हैं. दूसरे राज्यों के मुकाबले देखे तो प्रदेश में रोडवेज की हालत बेहद दयनीय है.

जानकारी के अनुसार गुजरात में 8 हजार सरकारी बसों का बेड़ा है. वह राजस्थान रोडवेज की वर्तमान सही सलामत बसों के मुकाबले 7 गुणा ज्यादा है. तेलंगाना और आंध्रा में 20 हजार से ज्यादा बसें हैं. प्रदेश में अच्छी कंडीशन की जो बसें थी उन्हें एनसीआर रूट पर लगा दिया गया है. क्योंकि इस रूट पर प्रदूषण फैलाने वाली बसें नहीं चल सकती है. जो बसें प्रदूषण फैला रही हैं उन्हें प्रदेश के दूसरे बाकी हिस्सों में लगा दिया गया है.

राजस्थान रोडवेज को इस वक्त करीब 8 हजार के बसों की जरूरत है. मौजूदा स्वस्थ बसों की गिनती हजार के करीब है. नए परिवहन मंत्री मिलने के बाद भी उत्साहजनक नतीजे सामने नहीं आ रहे हैं. एमडी आने वाले बजट से उम्मीद लगा रहे हैं लेकिन उसमें अभी काफी समय बाकी है. तब तक मौजूदा स्वस्थ बसों का आंकड़ा 400 से 500 तक पहुंच जाएगा. बहरहाल बैठकों का दौर जारी है, लेकिन नतीजा सिफर है.

Tags: Jaipur news, Rajasthan news, Rajasthan Roadways



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments