शेख हसीना के बाद बांग्लादेश के मुख्य न्यायाधीश ओबैदुल हसन ने भी शनिवार को अपना इस्तीफा दे दिया है। ओबैदुल हसन को हसीना सरकार ने पिछले साल ही बांग्लादेशी सुप्रीम कोर्ट का नेतृत्व करने के लिए चुना था। हसन को शेख हसीना का करीबी माना जाता है।
शेख हसीना के इस्तीफे और अंतरिम सरकार के गठन से उत्साहित प्रदर्शनकारियों ने लगातार उनके ऊपर इस्तीफा देने का दवाब बनाया हुआ था। प्रदर्शनकारियों द्वारा धमकी दी गई थी कि अगर चीफ जस्टिस अपना पद 1 बजे तक नहीं छोड़ते हैं तो उनका घेराव किया जाएगा।
इसके बाद अंतरिम सरकार में कानून एवं न्याय और पार्लियामेंट्री अफेयर्स के सलाहकार आसिफ नजरुल ने अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट किया कि मुझे लगता है कि यह खास खबर आप सभी के साथ शेयर करना जरूरी है। हमारे चीफ जस्टिस ने कुछ समय पहले इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे को बिना किसी देरी के कानून मंत्रालय में भेज दिया गया है। वहां पर काम पूरा होने के बाद हम बिना किसी देरी के इसे राष्ट्रपति के पास भेज देंगे।
क्या प्रदर्शन के दवाब से बदलवा दोगे कोर्ट का फैसला- चीफ जस्टिस (4 जुलाई को)
शेख हसीना की वर्षों पुरानी सत्ता को डुबा देने वाले इस प्रदर्शन की शुरूआत आरक्षण के मुद्दे पर ही हुई थी। हाईकोर्ट ने 1971 के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बच्चों के लिए सरकारी नौकरी में 30 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था को फिर से लागू कर दिया था। क्योंकि अवामी लीग शेख मुजीब की पार्टी है और उस समय पर आवामी लीग के लोगों ने ही सबसे ज्यादा स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया था, जिस कारण इस फैसले को आवामी लीग के हित में माना गया। हालांकि इस आरक्षण को 2018 में भारी विरोध के बाद हसीना सरकार ने हटा दिया था।
4 जुलाई को आरक्षण के विरोध में जब बांग्लादेश की सड़कों पर प्रदर्शन हो रहे थे तब चीफ जस्टिस ओबैदुल हसन ने कहा, ” आखिर सड़कों पर इतने प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं? क्या आप हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट के ऊपर प्रदर्शनों का दवाब बना कर फैसला बदलवा लेंगे?”
चीफ जस्टिस ने बुलाई थी सभी जजों की मीटिंग, लेकिन प्रदर्शन के चलते फेल
इस्तीफे के पहले चीफ जस्टिस ने फुल कोर्ट मीटिंग बुलाई थी, जिसमें बांग्लादेशी सुप्रीम कोर्ट के दोनों डिवीजनों के सारे जज शामिल होने थे। प्रदर्शनकारियों को जैसे ही इस मीटिंग का पता चला उन्हें इसमें न्यायिक तख्तापलट की आशंका हुई और आनन-फानन में उन्होंने हाइकोर्ट में प्रदर्शन करने का ऐलान कर दिया। इसके बाद चीफ जस्टिस ने मीटिंग को टाल दिया और कुछ देर के बाद अपना इस्तीफा दे दिया।
इस्तीफे के पहले प्रदर्शनकारियों ने लगातार चीफ जस्टिस के ऊपर दवाब बनाया हुआ था कि उन्हें जल्द से जल्द इस्तीफा देना होगा। इसके बाद धमकी भी दी गई कि अगर उनकी यह मांग नहीं मानी गई तो जजों के घरों का घेराव किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में जुटना शुरू किया और चीफ जस्टिस को देना पड़ा इस्तीफा
इस्तीफे के पहले चीफ जस्टिस पर दवाब बनाने के लिए कई सौ प्रदर्शनकारी छात्र सुप्रीम कोर्ट के परिसर में आने लगे। बांग्लादेशी सेना वहां पर सुरक्षा के लिए तैनात थी। सेना ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की। इसके बाद ही चीफ जस्टिस के इस्तीफे की खबर आ गई।


