Tuesday, March 3, 2026
Google search engine
HomeBlogसमंदर के भीतर मार्कोस कमांडो बनेंगे और घातक, नेवी की स्पेशल ऑपरेशन...

समंदर के भीतर मार्कोस कमांडो बनेंगे और घातक, नेवी की स्पेशल ऑपरेशन के लिए छोटी पनडुब्बियों को हासिल करने की योजना


नई दिल्ली. भारतीय नौसेना (Indian Navy) विशेष समुद्री अभियानों के लिए अपने समुद्री कमांडो (MARCOS) की क्षमताओं को आधुनिक बनाने और मजबूत करने की कोशिशों के तहत स्वदेशी रूप से निर्मित तैरने वाले डिलीवरी वाहनों को हासिल करने की योजना बना रही है. इनको पानी के भीतर चलने वाले रथ (undersea chariots) और छोटी पनडुब्बियों (midget submarines) के रूप में भी जाना जाता है. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक समुद्र के भीतर चलने वाली ये छोटी पनडुब्बियां कम से कम छह लोगों के एक दल को ले जाने में सक्षम होंगी और लिथियम-आयन बैटरी से संचालित होंगी. सूत्रों के मुताबिक शुरुआती प्रोटोटाइप को मंजूरी मिलने के बाद नौसेना के लिए ऐसी कुछ दर्जन छोटी पनडुब्बियों को खरीदने की योजना है.

इन डिलीवरी वाहनों का आकार गोताखोरों को इनमें बड़े सिलेंडर ले जाने में सक्षम बनाएगा. जिससे वे लंबे समय तक पानी के नीचे रह सकेंगे और इस तरह उथले पानी में रहने की उनकी क्षमता में बढ़ोतरी होगी. इन पनडुब्बियों का आकार विभिन्न अभियानों के लिए अतिरिक्त हथियार ले जाने की भी सुविधा देगा. नौसेना फिलहाल इस इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की सलाह से समुद्र के पानी के भीतर चलने वाली इन छोटी पनडुब्बियों को डिजाइन कर रही है, जिसके आधार पर प्रोटोटाइप बनाया जाएगा. इस तरह की छोटी पनजुब्बियों को समुद्र के अंदर लगभग सभी उन्नत नौसेनाएं उपयोग करती हैं.

अगर नौसेना को उथले पानी में काम करना हो, निगरानी करनी हो या प्रतिद्वंद्वी के तटीय प्रतिष्ठानों, बंदरगाह में उसके जहाजों को निशाना बनाना हो तो ये बहुत काम आते हैं. इन स्व-चालित वाहनों को जहाजों या पनडुब्बियों से लॉन्च किया जा सकता है, जो उनके आकार और उनकी भूमिका के आधार पर होता है. द्वितीय विश्व युद्ध में मानव संचालित टॉरपीडो को चेरियट कहा जाता था. मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान नौसेना के पास एक छोटी पनडुब्बी है, जो एक नियमित पनडुब्बी के आकार का एक छोटा हिस्सा है. जिसका उपयोग इसके विशेष सेवा समूह एसएसजी (एन) द्वारा किया जाता है.

ये चेरियट समुद्री कमांडो को प्रतिद्वंद्वी के बंदरगाह के करीब के क्षेत्रों तक पहुंचने और हथियारों और उपकरणों के परिवहन में मदद करते हैं. क्योंकि उथले पानी के कारण पनडुब्बियां वहां पहुंचने में सक्षम नहीं होती हैं. मौजूदा समय में नौसेना द्वारा उपयोग किए जाने वाले तैराक वितरण वाहनों के बारे में अधिक जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है. कुछ स्रोत कई साल से नौसेना के इतालवी चेरियट के उपयोग की ओर इशारा करते हैं. 2012 के आसपास रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड को इनमें से दो पनडुब्बियां बनाने के लिए कहा था.

Tags: India Navy, Indian navy, Navy, Submarines



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments