जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने कश्मीरी पत्रकार सज्जाद अहमद डार के खिलाफ जन सुरक्षा अधिनियम यानी PSA की कार्यवाही को रद्द कर दिया और प्रशासन को आदेश दिया कि यदि किसी दूसरे मामले में जरूरत ना हो तो सज्जाद को तुरंत रिहा किया जाए. उधर, हाईकोर्ट ने एक और पत्रकार फहद शाह को भी उनकी बंद हो चुकी पत्रिका ‘द कश्मीर वाला’ में कथित तौर पर देश विरोधी लेख छपने के मामले में जमानत दे दी. जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बहुत तल्ख टिप्पणी भी की.
हाईकोर्ट ने क्या-क्या कहा?
जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को दरकिनार करते हुए कहा कि सज्जाद अहमद डार के खिलाफ कोई खास आरोप नहीं थे, जिससे यह साबित होता हो कि वह सुरक्षा के लिए किसी तरह से खतरा हैं.
जस्टिस कोटेश्वर सिंह और जस्टिस एम.ए. चौधरी (Justice M A Chowdhary) की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा, ”प्रशासन ने खुद माना है कि आरोपी ने पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है और एक पत्रकार के तौर पर काम कर रहा था. बतौर रिपोर्टर उनकी ड्यूटी थी कि इलाके में होने वाली घटनाओं को रिपोर्ट करें, जिसमें सुरक्षा बलों के ऑपरेशन भी शामिल थे…”
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशासन की तरफ से सरकारी नीतियों, आयोग, अथवा सरकारी मशीनरी की आलोचना करने वालों को इस तरीके से हिरासत में लेना पूरी तरह कानून का दुरुपयोग है. मौजूदा केस में भी एक मीडिया कर्मी को इस तरीके से हिरासत में लेना इसी के दायरे में आता है.
कौन हैं सज्जाद अहमद डार?
सज्जाद अहमद डार ‘द कश्मीर वाला’ (The Kashmir Walla) पत्रिका के लिए काम करते थे और सज्जाद गुल के नाम से लिखा करते थे. जम्मू कश्मीर पुलिस ने 6 जनवरी 2022 को एक चरमपंथी के परिवार द्वारा भारत विरोधी नारे लगाने वाला वीडियो अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा करने के आरोप में डार को गिरफ्तार किया था.
क्या-क्या आरोप लगाए थे?
जम्मू कश्मीर पुलिस ने डार के खिलाफ अपने पीएसए डॉजियर में लिखा था कि वह काफी पढ़े लिखे हैं और सोशल मीडिया को सरकार के खिलाफ उकसाने के लिए एक माध्यम के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं. डॉजियर में यह भी लिखा था कि उन्होंने जम्मू कश्मीर सरकार की वेलफेयर स्कीम के बारे में बहुत कम रिपोर्टिंग की. विवादित ट्वीट किए और पाकिस्तानी एजेंट्स के इशारे पर काम किया.

हाईकोर्ट ने दिखाया आइना
जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने कहा कि जम्मू कश्मीर पुलिस के डॉजियर में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है कि डार ने किस तारीख को और कौन सा ऐसा लेख लिखा, जो सरकार के खिलाफ दुश्मनी पैदा करने वाला है या लोगों को उकसाने वाला है. हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा, ”डार को दस्तावेज देने से इनकार करना और उनकी लगातार हिरासत अवैध मानी जाएगी और हिरासत के आदेश को इसी आधार पर रद्द किया जाना चाहिए…”
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FIRST PUBLISHED : November 21, 2023, 09:45 IST


