Thursday, February 26, 2026
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सर, शिशु जन्‍म के 2 दिन बाद मुझे 300 KM दूर बुलाया… महिला की याचिका पर हाईकोर्ट ने क्‍या कहा?


नई दिल्‍ली. गुजरात हाईकोर्ट में एक महिला ने याचिका लगाई और कहा कि उन्‍हें बच्‍चे को जन्‍म देने के महज दो दिन बाद गुजरात पब्लिक सर्विस कमिशन (GPSC) द्वारा इंटरव्‍यू के लिए बुलाया गया. जिस जगह इंटरव्‍यू कंडक्‍ट किया जाना था वो उनके घर से करीब 300 किलोमीटर की दूरी पर था. अपनी मेडिकल कंडीशन के चलते वो इंटरव्‍यू नहीं दे सकी और कमीशन की तरफ से भी इस संबंध में उनकी कोई मदद नहीं की गई. गुजरात हाईकोर्ट ने पेश मामले में जीपीएससी की जमकर क्‍लास लगाई. न्यायमूर्ति निखिल कारियल की बेंच ने इसे पूर्ण लैंगिक असंवेदनशीलता करार दिया.

पीड़िता राधिका पवार को सहायक प्रबंधक (वित्त और लेखा) वर्ग II के पद के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था. उक्त पद के लिए चयन प्रक्रिया साल 2020 में शुरू की गई थी. हालांकि, परिणाम 8 दिसंबर, 2023 को घोषित किए गए और पवार को सफल उम्मीदवारों में से एक के रूप में दिखाया गया था. पवार GPSC ने ईमेल भेजकर अंतिम इंटरव्‍यू के लिए 1 और 2 जनवरी, 2024 को निर्धारित डेट पर आने के लिए कहा. उन्होंने जीपीएससी को ईमेल के माध्यम से सूचित किया कि वह गर्भवती थीं और उनकी डिलीवरी जनवरी के पहले सप्ताह में होने वाली थी.

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महिला ने की थी इंटरव्‍यू में देरी की अपील
बाद में उन्होंने 31 दिसंबर, 2023 को एक बच्चे को जन्म दिया और एक ईमेल भेजकर सूचित किया कि वह घर से 300 किलोमीटर दूर गांधीनगर जिले की यात्रा करने की स्थिति में नहीं होंगी. यदि संभव हो तो वैकल्पिक व्यवस्था की जाए. जीपीएससी ने एक ईमेल के माध्यम से याचिकाकर्ता को सूचित किया कि उन्हें तो 2 जनवरी को आना होगा. कोई अन्य तारीख नहीं दी जाएगी. याचिकाकर्ता की शिकायत पर ध्यान देते हुए न्यायमूर्ति निखिल कारियल ने कहा कि जीपीएससी का आचरण सबसे “पवित्र प्राकृतिक प्रक्रियाओं” में से एक- बच्चे को जन्म देना जैसी प्रति पूर्ण लैंगिक असंवेदनशीलता को दर्शाता है.

एक टैलेंटेड उम्मीदवार को हक से वंचित रखा
हाईकोर्ट ने कहा, “इस न्यायालय की राय में, जीपीएससी का ऐसा जवाब जीपीएससी द्वारा पूर्ण लैंगिक असंवेदनशीलता को दर्शाता है, खासकर तब जब यह स्पष्ट था कि याचिकाकर्ता, जो एक टैलेंटेड उम्मीदवार थी. बच्‍चे को जन्‍म देने के 3 दिन बाद वो इंटरव्‍यू में भाग लेने में शारीरिक रूप से सक्षम नहीं होंगी. फिर भी इंटरव्‍यू स्‍थगित या कोई वैकल्पिक तरीका प्रदान करने के उनके अनुरोध पर विचार नहीं किया गया. यह जीपीएससी पर निर्भर था कि या तो इंटरव्‍यू प्रक्रिया को स्थगित कर दिया जाए या ऑनलाइन इंटरव्‍यू आदि जैसे वैकल्पिक समाधान प्रदान किए जाएं.”

सर, शिशु जन्‍म के 2 दिन बाद मुझे 300 KM दूर बुलाया… महिला की याचिका पर हाईकोर्ट ने क्‍या कहा?

हाईकोर्ट ने क्‍या दिया आदेश?
9 जनवरी को कोर्ट के अपने आदेश में हाईकोर्ट ने महिला की याचिका पर जीपीएससी से जवाब मांगते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया अपने आप में बिजली की गति से नहीं चल रही थी, विशेषकर तब से जब यह 2020 में शुरू हुई थी जबकि परीक्षा के परिणाम दिसंबर 2023 में घोषित किए गए थे. न्यायालय ने अधिकारियों को अगले आदेश तक सहायक प्रबंधक (वित्त और लेखा) वर्ग II (एसईबीसी श्रेणी) के लिए एक पद खाली रखने का भी निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी.

Tags: Gujarat High Court, Gujarat news, Gujarat News Today



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