खेती में बढ़ती लागत और मिट्टी की गिरती उर्वरता के बीच अब किसान तेजी से खाद के ऑर्गेनिक ऑप्शन भी तलाश रहे हैं. इसी बीच वर्मी कम्पोस्ट एक आसान, सस्ता और असरदार ऑप्शन बनकर सामने आया है. इसे घर या खेत के पास ही तैयार किया जा सकता है. इससे न सिर्फ मिट्टी के गुणवत्ता सुधरती है, बल्कि फसलों की पैदावार भी बेहतर होती है.
एक्सपर्ट्स के अनुसार, वर्मी कम्पोस्ट ऑर्गेनिक कचरे को उपयोगी खाद में बदलने का तरीका है, जिसमें केंचुए अहम भूमिका निभाते हैं. सही प्रक्रिया से यह खाद करीब पास 45 से 65 दिनों में तैयार हो जाती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि घर पर ही आप वर्मी कम्पोस्ट खाद कैसे तैयार कर सकते हैं.
कैसे तैयार कर सकते हैं वर्मी कम्पोस्ट?
वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए सबसे पहले छायादार जगह का चयन करना जरूरी होता है. यहां गड्ढा तैयार किया जाता है, जिसमें पानी निकलने की सही व्यवस्था होनी चाहिए. गड्ढा तैयार करने के बाद उसमें सूखी पत्तियां, भूसा या कागज की परत बिछाई जाती है. इसके ऊपर गोबर और रसोई से निकला ऑर्गेनिक कचरा जैसे सब्जियों के छिलके डाले जाते हैं. अब इस मिक्सचर को हल्का नम बनाए रखने के लिए समय-समय पर पानी का छिड़काव किया जाता है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि गड्ढे का आकार लगभग 2 मीटर लंबा, एक मीटर चौड़ा और करीब 1 फुट गहरा रखना सही होता है. वहीं कच्चे गोबर को पहले पानी डालकर ठंडा किया जाता है और 24 घंटे तक छोड़ दिया जाता है. इसके बाद इसमें केंचुए डाले जाते हैं.
कितने दिन में तैयार हो जाती है खाद?
यह पूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद लगभग 60 से 65 दिनों में वर्मी कम्पोस्ट तैयार हो जाती है. कुछ मामलों में सही देखभाल और सही वातावरण मिलने पर यह 50 दिनों में भी तैयार हो सकती है. जब कचरा पूरी तरह सड़ कर काली दानेदार खाद में बदल जाए, तो उसे इस्तेमाल के लिए तैयार माना जाता है. वहीं वर्मी कम्पोस्ट बनाते समय तापमान और नमी का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है. केंचुए के लिए 5 डिग्री सेल्सियस से 40 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान सही होता है. ज्यादा गर्मी होने पर गड्ढे को जूट की बोरियों या घास से ढकना और हल्का पानी छिड़कना बहुत जरूरी होता है. वहीं नमी का स्तर भी संतुलित रखना चाहिए, क्योंकि ज्यादा पानी से केंचुओं को नुकसान हो सकता है.
ताजा गोबर से बचाना क्यों है जरूरी?
एक्सपर्ट के अनुसार, वर्मी कम्पोस्ट बनाते समय ताजा गोबर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इसमें बनने वाली गैस और ज्यादा तापमान केचुओं के लिए हानिकारक होती है. इसलिए गोबर और दूसरे ऑर्गेनिक कचरे को पहले कुछ दिनों तक सड़ने के लिए छोड़ना चाहिए, ताकि तापमान नॉर्मल हो जाए और केंचुओं के लिए सही एनवायरमेंट तैयार हो सके.
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