हिंदी के कालजयी रचनाकार सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ ताउम्र तमाम तरह की विद्रूपताओं को खुलकर कहते और लिखते रहे. उन्होंने अपने दौर की कविता को भीड़ से निकाल कर जनतांत्रिक बनाया. हिंदी कविता को नए तेवर देने वाले इस जनकवि का योगदान चिरस्मरणीय है और रहेगा.
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