हाइलाइट्स
रूमेटाइड अर्थराइटिस का खतरा युवा महिलाओं को ज्यादा होता है.
यह बीमारी अगर ज्यादा बढ़ जाए, तो घुटने रिप्लेस कराने पड़ सकते हैं.
All About Rheumatoid Arthritis: उम्र बढ़ने के साथ हमारी हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और बुजुर्गों को इससे संबंधित परेशानियां पैदा हो जाती हैं. अक्सर आपने देखा होगा कि बुजुर्ग लोग घुटनों के दर्द से परेशान रहते हैं और इस समस्या को ऑस्टियोअर्थराइटिस कहा जाता है. हालांकि कई बार 25 से 30 साल की उम्र के युवाओं के घुटनों में भी समस्या हो जाती हैं और घुटने खराब होने लगते हैं. इस परेशानी को रूमेटाइड अर्थराइटिस कहते हैं. रूमेटाइड अर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून डिजीज होती है, जो लोगों के घुटनों को खराब कर देती है. इस परेशानी में युवाओं के घुटने ही नहीं, बल्कि हाथ-पैर और गर्दन में भी अकड़न महसूस होती है. इस बीमारी का कोई बचाव नहीं है, जिसकी वजह से वक्त रहते इसका इलाज कराना बहुत जरूरी होता है.
ग्रेटर नोएडा के फोर्टिस हॉस्पिटल के सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. भरत गोस्वामी के मुताबिक रूमेटाइड अर्थराइटिस घुटनों की एक गंभीर समस्या है, जो लोगों के हाथ-पैर और गर्दन को भी प्रभावित करती है. यह ऑटोइम्यून डिजीज होती है, जिसकी वजह से कम उम्र के लोग इसका शिकार होते हैं. रूमेटाइड अर्थराइटिस का खतरा युवाओं को ज्यादा होता है. 30 साल के आसपास के लोगों को इसका खतरा ज्यादा होता है. पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं इस बीमारी की चपेट में ज्यादा आती हैं. खासतौर से प्रेग्नेंसी के बाद महिलाओं को रूमेटाइड अर्थराइटिस होने का जोखिम सबसे ज्यादा होता है. रूमेटाइड अर्थराइटिस का सही समय पर पता लग जाए, तो दवाइयों के जरिए इसका इलाज किया जा सकता है. हालांकि कंडीशन अत्यधिक गंभीर हो, तो घुटने रिप्लेसमेंट की नौबत आ सकती है.
डॉ. भरत गोस्वामी की मानें तो रूमेटाइड अर्थराइटिस से बचाव करने का कोई तरीका नहीं है. यह स्थिति बच्चे के जन्म के बाद बहुत सी महिलाओं में देखी जाती है. ऐसे में अगर किसी को कम उम्र में घुटने, हाथ-पैर या गर्दन में ज्यादा अकड़न की समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर जांच करानी चाहिए. समय पर ट्रीटमेंट लेने से इस परेशानी को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. कई लोग घुटनों में दर्द होने पर अपनी मर्जी से स्टेरॉयड लेना शुरू कर देते हैं, लेकिन ऐसा करने से बचना चाहिए. स्टेरॉयड की कई अच्छी वैकल्पिक दवाएं उपलब्ध हैं और डॉक्टर की दी हुई दवाओं का ही सेवन करना चाहिए. अलग-अलग मरीजों की कंडीशन के अनुसार दवाएं अलग हो सकती हैं. लोगों को रूमेटाइड अर्थराइटिस को लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए.
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FIRST PUBLISHED : February 2, 2024, 15:46 IST


