हाइलाइट्स
उद्धव ठाकरे ने स्पीकर के आदेश को लोकतंत्र की हत्या बताया.
उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी अपमान है.
ठाकरे ने कहा कि हम जनता को साथ लेकर लड़ेंगे.
मुंबई. महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने आज शिवसेना (Shiv Sena) के बागी विधायकों से जुड़े मामले पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि 21 जून 2022 को जब प्रतिद्वंद्वी गुट बना तब शिंदे गुट ही असली शिवसेना राजनीतिक दल था. विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा कि विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग वाली सभी याचिकाएं खारिज की जाती हैं. शिवसेना के किसी भी गुट का कोई भी विधायक अयोग्य नहीं है. विधानसभा अध्यक्ष के एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) गुट को असली शिव सेना बताए जाने के बाद मुंबई में शिवसेना-शिंदे गुट के कार्यालय में जश्न मनाया गया. मगर इसके बाद शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट के नेताओं ने नाराजगी जताई.
महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे (Uddhav Thakrey) ने कहा कि ‘आज जो स्पीकर का आदेश आया है वह लोकतंत्र की हत्या है और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले का भी अपमान है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि राज्यपाल ने अपने पद का दुरुपयोग किया है और गलत फैसला लिया है…हम ये लड़ाई आगे लड़ेंगे और हमें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है…’ ठाकरे ने कहा कि ‘हम जनता के बीच रहे हैं, जनता के बीच रहेंगे और जनता को साथ लेकर हम लड़ेंगे…’
उधर महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष के शिंदे गुट को असली शिवसेना बताए जाने पर एनसीपी के चीफ शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा कि ‘इस फैसले के बाद अब उद्धव को सुप्रीम कोर्ट जाना होगा…उन्हें सुप्रीम कोर्ट में न्याय मिलने की उम्मीद है. अंबादास दानवे ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और इस फैसले को चुनौती देंगे…’ वहीं शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने कहा कि ‘आज का फैसला कोई न्याय नहीं है ये एक षड्यंत्र है, हम सुप्रीम कोर्ट जरूर जाएंगे. हमारी लड़ाई न्यायालय में जारी रहेगी….’
उद्धव का निर्णय पार्टी का फैसला नहीं…स्पीकर ने एकनाथ शिंदे को माना शिव सेना का असली ‘किंग’

गौरतलब है कि महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने बुधवार को कहा कि 21 जून, 2022 को जब प्रतिद्वंद्वी समूहों का उदय हुआ तो शिवसेना का एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला धड़ा ही ‘असली’ शिवसेना था. नार्वेकर ने यह भी कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के सुनील प्रभु 21 जून, 2022 से सचेतक नहीं रहे. उन्होंने कहा कि शिंदे गुट के भरत गोगावाले अधिकृत सचेतक बन गए थे. जैसे ही फैसले का आशय साफ हुआ, मुख्यमंत्री शिंदे के गुट के समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया. उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग को सौंपा गया 1999 का पार्टी संविधान मुद्दों पर निर्णय लेने के लिए वैध संविधान था. ठाकरे समूह का यह तर्क कि 2018 के संशोधित संविधान पर भरोसा किया जाना चाहिए, स्वीकार्य नहीं था.
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Tags: Maharashtra Politics, Shiv sena, Shiv sena controversy, Uddhav thackeray
FIRST PUBLISHED : January 10, 2024, 21:24 IST


