Wednesday, February 11, 2026
Google search engine
Homeदेशहुबली की गौशाला में हुआ चमत्कार, लगड़े बछड़े को कृत्रिम पैर लगाकार...

हुबली की गौशाला में हुआ चमत्कार, लगड़े बछड़े को कृत्रिम पैर लगाकार मिला नया जीवन


हुबलीः इंसानों में तो कृत्रिम अंग लगना आम बात है, लेकिन जानवरों में यह प्रयोग किसी चमत्कार से कतई कम नहीं है. मामला कर्नाटक के हुबली का है. यहां एक बछड़े को कृत्रिम टांग लगाने का सफल ऑपरेशन किया गया है. अब यह बछड़ा अच्छी तरह से अपने चारों पैरों पर चल-फिर रहा है. पशु प्रेमियों, गैर सरकारी संगठन और कृत्रि अंग केंद्र के सहयोग से यह संभव हो पाया है.

जानकारी के अनुसार, धारवाड़ में पशु प्रेमियों के एक ग्रुप को एक बछड़ा मिला था, जिसका एक पैर रेलगाड़ी की चपेट में आने से कट गया था. बछड़ा अपनी मां के साथ रेलवे ट्रैक पर घास चर रहा था. तभी वे दोनों एक ट्रेन की चपेट में आ गए. बछड़े की मां की तो फौरन मृत्यु हो गई, लेकिन बछड़े का एक पैर पूरी तरह से कट गया. पशु प्रेमी इस बछड़े को धारवाड़ से हुबली में एक गौशाला में लाए. गौशाला के कर्मचारियों ने हुबली में महावीर कृत्रिम अंग केंद्र से संपर्क किया. महावीर कृत्रिम अंग केंद्र आर्टिफिशियल अंगों के डिजाइन और निर्माण में अच्छा काम कर रहा है. लेकिन यह केवल मनुष्यों के अंग तैयार करता है. लगभग पांच साल पहले इस केंद्र एक विकलांग घोड़े के लिए कृत्रिम अंग बनाया था. इस बात को ध्यान में रखते हुए गौशाला संचालकों ने महावीर केंद्र से संपर्क किया.

महावीर कृत्रिम अंग केंद्र के एक्सपर्ट ने कड़ी मेहनत के बाद बछड़े का एक पैर तैयार किया और उसे लगा दिया. कृत्रिम अंग केंद्र के वरिष्ठ तकनीशियन एमएच नायकर ने बताया कि एक सप्ताह की योजना और डिजाइन के बाद वे एक कृत्रिम अंग बनाने में सफल हुए जो बछड़े को चलने और दौड़ने में सक्षम बनाएगा.

पशुओं के लिए तैयार किया कृत्रिम पैर, देश-दुनिया में मचा रहा धूम

महावीर कृत्रिम अंग केंद्र के एक्सपर्ट की यह मेहनत किसी चमत्कार से कम नहीं थी. बछड़े को एक नए अंग के साथ नई आजादी मिली है. अब बछड़ा गौशाला के पूरे मैदान में सरपट दौड़ता नजर आता है. हालांकि बछड़े के लिए अंग को अधिक आरामदायक बनाने के लिए इसमें अभी और सुधार किए जा रहे हैं. लेकिन यह प्रयोग बेजुवान जानवरों के जीवन में आशा की एक नई किरण लेकर आया है.

गौशाला के संचालक यल्लप्पा ने बछड़े में बड़े बदलाव को देखकर बहुत खुशी व्यक्त की है. उन्होंने हुए कहा कि इससे पहले केवल इंसानों में ही ऐसे चमत्कार देखे थे, लेकिन गाय में पहली बार इसे देखना वास्तव में असाधारण है.

जयपुर के डॉक्टर भी कर रहे हैं ये काम
जयपुर में पशु पालन विभाग में तैनात वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. तपेश माथुर ने पशुओं के लिए कृष्णा लिम्ब नाम से कृत्रिम पैर तैयार किया है. वे लगभग 100 पशुओं के यह कृत्रिम पैर लगा चुके हैं. खास बात ये है कि डॉ. तपेश यह काम बिना किसी फीस के करते हैं. यानी पशुओं को कृत्रिम पैर बिल्कुल मुफ्त लगाय जाता है. उनके इस कृत्रिम पैर की डिमांड भारत से बाहर के देशों से भी आ रही है.

Tags: Karnataka



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments