हाइलाइट्स
भारतीय रेलवे ने इस घटना के बाद अपनी गलती नहीं मानी. बुजुर्ग को शिकायत पुस्तिका तक नहीं दी गई.
जिस स्टेशन पर बुजुर्ग को उतरना था वहां प्लेटफॉर्म ट्रेन से छोटा था, जिसके चलते बुजुर्ग को ट्रेन से कूदना पड़ा.
नई दिल्ली. चेन्नई के एक 62 वर्षीय बुजुर्ग को भारतीय रेलवे की उदासीनता का सामना करना पड़ा. दरअसल, हुआ कुछ यूं कि जिस ट्रेन में वो सवार थे वो इतनी लंबी थी कि प्लेटफॉर्म पर पूरी नहीं आई. जिसके चलते उन्हें ट्रेन से छलांग लगाने पर मजबूर होना पड़ा. इस दौरान वो घायल हो गए. उन्होंने रेलवे से इस संबंध में शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. अब कंज्यूमर कोर्ट ने रेलवे को ऐसा सबक सिखाया है कि वो इसे जीवनभर याद रखेंगे.
बुजुर्ग केवी रमेश ने बताया कि दो साल पहले उन्हें गुजरात के अंकलेश्वर स्टेशन पर नवजीन एक्सप्रेस ट्रेन से ट्रैक पर कूदना पड़ा. रमेश 5 दिसंबर, 2021 को चेन्नई से ट्रेन में चढ़े थे और एक अदालती मामले की सुनवाई में शामिल होने के लिए शहर जा रहे थे. ट्रेन अंकलेश्वर स्टेशन पर रुकी, तो एक सेकेंड-एसी और तीन अन्य डिब्बे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर नहीं पहुंचे. प्लेटफार्म इतना छोटा था कि सभी कोच उसके अनुरूप नहीं हो पा रहे थे.
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थाने में दी रेलवे के खिलाफ शिकायत
एक निजी फर्म में परचेज मैनेजर के रूप में काम कर चुके बुजुर्ग ने कहा “यहां ट्रेन केवल दो मिनट के लिए रुकती है और मुझे अपने सामान के साथ ट्रेन से कूदना पड़ा. जैसे ही मैंने ऐसा किया, मैंने खुद को घायल कर लिया.’’ उन्होंने अंकलेश्वर थाने में इसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और यहीं नहीं रुके. चेन्नई लौटने के बाद, उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, चेन्नई (उत्तर) में मामला दायर किया.
क्या कहता है रेल नियम?
रमेश कहते हैं, ”मैं अदालती मामले के लिए समय पर नहीं पहुंच सका क्योंकि स्टेशन मास्टर शिकायत पुस्तिका देने के लिए तैयार नहीं थे.” उन्होंने इस उद्देश्य के लिए खरीदी गई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और किताबों की मदद से अपने दम पर केस लड़ा. वे कहते हैं कि रेलवे अधिनियम के अनुसार, जिन स्टेशनों पर प्लेटफार्म छोटे हैं या डिब्बों की संख्या अधिक है, तो विभाग को यात्रियों के उतरने के लिए रेत की बोरियां लगानी होती हैं.”

रेलवे पर मोटा जुर्माना
सरकारी अस्पताल में ली गई चिकित्सा सहायता, स्टेशन पर की गई शिकायत की एक प्रति, ट्रेन टिकट की एक प्रति और केस स्लिप उन सबूतों में से थे जो उन्होंने उपभोक्ता न्यायालय को सौंपे थे. द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार शिकायतकर्ता सेवा में कमी और मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजे के रूप में कंज्यूमर कोर्ट ने रेलवे पर ₹25,000 का जुर्माना और शिकायत की लागत के लिए ₹5000 देने के लिए कहा .”
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FIRST PUBLISHED : January 10, 2024, 18:14 IST


