Friday, February 27, 2026
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delhi high court come hard on rohingya refugees plea over hate speech on facebook treatment worst than disease


नई दिल्‍ली. रोहिंग्‍या शरणार्थियों को दिल्‍ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. रोहिंग्‍या शरणार्थियों ने हाईकोर्ट में सोशल मीडिया में उनके खिलाफ चल रहे हेट स्‍पीच (घृणा फैलाने वाला भाषण) को लेकर याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया है. कोर्ट ने शरणार्थियों की याचिका खारिज ही नहीं की बल्कि बेहद सख्‍त टिप्‍पणी भी की. रोहिंग्‍या शरणार्थियों के लिए इसे एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है.

दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र को सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक को अपने मंच पर रोहिंग्या के खिलाफ घृणा भाषण का कथित तौर पर प्रचार करने से रोकने का निर्देश देने से इनकार कर दिया है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अगुवाई वाली पीठ ने बुधवार को जारी आदेश में दो रोहिंग्या शरणार्थियों की जनहित याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कानून शिकायतों के निस्तारण के लिए पूरी मशीनरी उपलब्ध कराता है.

‘इलाज बीमारी से भी बदतर’
पीठ में न्यायमूर्ति मनमीत पीएस अरोड़ा भी शामिल रहे. दिल्‍ली हाईकोर्ट की पीठ ने कहा, ‘इस अदालत की राय है कि सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं का यह सुझाव कि फेसबुक पर रोहिंग्याओं के किसी भी प्रकाशन की पूर्व सेंसरशिप होनी चाहिए, एक ऐसे इलाज का उदाहरण है जो बीमारी से भी बदतर है.’ याचिका में दावा किया गया है कि फेसबुक पर जातीयता और धर्म के आधार पर शरणार्थियों को निशाना बनाकर की गई हिंसक और घृणित टिप्पणियों के प्रसार के परिणामस्वरूप शरणार्थियों को हिंसा का सामना करना पड़ता है.

'ऐसे इलाज का उदाहरण जो बीमारी से भी बदतर', रोहिंग्‍या शरणार्थियों की याचिका पर दिल्‍ली हाईकोर्ट की तल्‍ख टिप्‍पणी

क्‍या है रोहिंग्‍या संकट?
रोहिंग्या लोगों ने म्‍यांमार में दशकों से हिंसा, भेदभाव और उत्पीड़न का सामना किया है. रोहिंग्या को आधिकारिक जातीय समूह के रूप में मान्यता नहीं दी गई है और वर्ष 1982 से उन्हें नागरिकता से वंचित कर दिया गया है. वे दुनिया की सबसे बड़ी राज्यविहीन आबादी में से एक हैं. म्‍यांमार में हिंसा के कारण रोहिंग्याओं ने 1990 के दशक की शुरुआत से पलायन शुरू कर दिया. उनका सबसे बड़ा और तेज पलायन अगस्त 2017 में शुरू देखा गया, जब म्‍यांमार के रखाइन प्रांत में हिंसा भड़क उठी, जिसके कारण 742,000 से अधिक लोग पड़ोसी देशों में शरण लेने के लिए मजबूर हुए. इनमें अधिकांश महिलाएं एवं बच्चे थे.

(इनपुट: भाषा)

Tags: DELHI HIGH COURT, Rohingya Refugees



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