शिवकुमार जोगी/गुना. एमपी के गुना शहर से 35 किलोमीटर दूर बमौरी तहसील में प्राचीन कंकाली माता मंदिर है. यहां बने परमहंश आश्रम में आप को एक साथ तीन देवों के दर्शन करने को मिलेगा यह एम पी का पहला ऐसा मंदिर है, जहां ब्रह्माण्ड के रचियता ब्रह्मा, विष्णु, महेश बाल स्वरुप में पालने में झुला झूलते हुए है. यहां काफी दूर दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते है.
इस स्वरुप को धारण करने का उद्देश्य आज इस खबर के माध्यम से हम आप को बताने जा रहे है. चित्रकूट में बने अनसुइया माता मंदिर को इसका एक तरह से छोटी शाखा कहा जाता है. इस मंदिर में इतना खुबसूरत दृश्य दर्शाया गया है, जिसमें आप को अनुसुईया माता के साथ आप ब्रह्मा जी ,विष्णु जी और महेश जी का बाल स्वरुप है.
अनसुइया माता है सबसे बड़ी
इस आश्रम के पुजारी बहदुरानंद जी सरसवस्ती ने कहा कि एक समय तीन देवियों के बीच सबसे बड़ी शती देवी बनने को लेकर बहस चल रही थी. इसी बीच नारद जी का आगमन होता है. उन्होंने तीनों माता के बीच चल रही बात को सुना और कहा कि आप लोग बड़े नहीं है. मृत्युलोक में माता अनसुइया सबसे बड़ी है. उन्होंने यह सुना तब कहा कि यह कैसे बड़ी हो सकती है. इनकी परीक्षा ली जाए. जब इनकी परीक्षा ली गई तब अनसुइया माता ने तीनों देव को पहचान लिया और इनको जल के छिड़क कर बालक के स्वरुप में ला दिया था.
इस मंदिर में कंकाली माता की भी मूर्ति
इस मंदिर में कई सारे सुन्दर द्रश्य देखने को मिल जायेंगे. इसके साथ ही शिव जी ,दुर्गा जी, और कंकाली माता का भी दर्शन कर सकते है. यहां संत महात्माओं की ज्योत धुनी आप को हमेशा जलती दिखेगी. यहां नवरात्र में आप को काफी ज्यादा तादाद में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल जाएगी.यहां बेहद खुबसूरत गार्डन बना हुआ है, जहां श्रद्धालु दर्शन करने के बाद अपने परिवार के साथ समय बिता सकते है.
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FIRST PUBLISHED : February 2, 2024, 15:18 IST


