Wednesday, February 11, 2026
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बाबरी मस्जिद से भी पुरानी थी यह मजार… कैसे और क्यों एक झटके में हो गई जमींदोज?


नई दिल्ली: दिल्ली में अयोध्या की बाबरी मस्जिद से भी पुरानी एक मजार जमींदोज हो चुकी है. महरौली के संजय वन इलाके में सदियों से मौजूद बाबा हाजी रोजबीह की मजार को नेस्तनाबूद कर दिया गया. डीडीए यानी दिल्ली विकास प्राधिकरण ने 900 साल पुरानी इस मजार को अवैध मानकर बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया. 900 साल पुरानी मजार को लेकर दावा किया जा रहा है कि यह 12वीं शताब्दी से ही महरौली के संजय वन में स्थित थी. इस तरह से देखा जाए तो बाबा हाजी रोजबीह मजार उस बाबरी मस्जिद से भी पुरानी थी, जिसे 6 दिसंबर 1992 में ध्वस्त कर दिया गया था.

अयोध्या की बाबरी मस्जिद को लेकर दावा किया जाता है कि यह 1528 ई. में बनी थी. बाबरी मस्जिद का निर्माण पहले मुगल शासक बाबर के शासन में मुगल कमांडर मीर बाकी ने कराया था. हाजी रोजबीह मजार को अतिक्रमण मानकर 30 जनवरी को डीडीए अधिकारियों ने बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया. हाजी रोजबीर को लेकर कहा जाता है कि वह दिल्ली के पहले सूफी संतों में से एक थे. हाजी रोजबीह को लेकर दावा किया जाता है कि उन्होंने दिल्ली में हजारों लोगों को इस्लाम कबूल करवाया.

900 साल पुरानी जो मजार हुई ध्वस्त, वो संरक्षित स्मारक थी? किस लिस्ट में जिक्र, क्या है ASI स्टेटस

डीडीए ने 30 जनवरी को अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत महरौली स्थित इस मजार को जमींदोज कर दिया. डीडीए ने एक कमेटी की सिफारिश के आधार पर यह एक्शन लिया और 30 जनवरी को सुबह-सुबह बुलडोजर से हाजी रोजबीह मजार को ध्वस्त कर दिया. रिपोर्ट की मानें तो रिज प्रबंधन बोर्ड का मानना था कि रिज क्षेत्र सभी प्रकार के अतिक्रमण से मुक्त होना चाहिए, और इसलिए एक समिति का गठन किया गया, जिसने संजय वन के अंदर कई अवैध संरचनाओं को हटाने का सुझाव दिया. इसके बाद ही आनन-फानन में डीडीए की टीम ने एक्शन लिया और मजार को नेस्तानाबूद कर दिया.

बाबरी मस्जिद से भी पुरानी थी यह मजार... कैसे और क्यों एक झटके में हो गई जमींदोज?

यह मजार संरक्षित स्मारक थी या नहीं, इसे लेकर एएसआई के अफसर ने प्रवीण सिंह ने कहा कि यह मजार एएसआई के तहत संरक्षित स्मारकों की लिस्ट में नहीं थी. उन्होंने ने बताया कि यह लिस्ट में नहीं है. इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि इस दरगाग के विध्वंस से पहले डीडीए या किसी अन्य निकाय ने हमसे संपर्क नहीं किया था. हालांकि, इस मजार रका जिक्र 1922 में प्रकाशित ‘मोहम्मडन और हिंदू स्मारकों की लिस्ट, वॉल्युम III- महरौली जिला’ में भी है. दावा किया जाता है कि बाबा रोजबीह राय पिथौरा के समय दिल्ली आए थे और किले की खाई के पास एक गुफा में अपना निवास स्थान बनाया था. यह मजार किला लाल कोट के प्रवेश द्वार पर मौजूद थी.

Tags: Babri Mosque, Masjid, Mosque



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