Tuesday, February 10, 2026
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अनूप पासवान/कोरबा. राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवा परिवार के लोगों के समुचित उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल ने एक नेक पहल की शुरूआत की है. इस विशेष जनजाति के मरीजों को बेहतर उपचार करने की मंशा से अलग से डेस्क बनाई गई है, जिसके लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है. अस्पताल में जब कोई पहाड़ी कोरवा परिवार का सदस्य ईलाज कराने आता है, तब पूरा स्वास्थ्य अमला उसके उपचार के लिए जुट जाता है और पूरी तरह से स्वस्थ्य होने के बाद उन्हें बाकायदा घर तक पहुंचाया जाता है.

पहाड़ी कोरबा, ये नाम आपने बहुत बार सुना होगा. नाम सुनते ही हमारे जहन में ऐसे लोगों की तस्वीर उतर आती है, जो दूर जंगलों और पहाड़ों पर निवास करते हैं. शहर की चकाचौंध से दूर पहाड़ी कोरबा परिवार को विकास से कोई मतलब नहीं है. यही वजह है कि आज भी ये पिछड़े हुए हैं. इनके उत्थान और विकास के लिए कई योजनाएं बनी, लेकिन उनका बेहतर क्रियान्वयन नहीं हो सका. विशेष जनजातियों के स्वास्थ्य को लेकर काफी गंभीरता दिखाई जा रही है. मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल में इनके उपचार के लिए अलग से डेस्क बनाई गई है. जिसके लिए अलग से नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी की गई है. जब भी कोई पहाड़ी कोरबा व्यक्ति अस्पताल पहुंचता है तब स्वास्थ्य अमला उसको यह महसूस कराने में जुट जाता है कि यह अस्पताल नहीं बल्की घर है. उसके जांच, उपचार, रहने खाने की पूरी व्यवस्था की जाती है. यहां तक की उपचार होने के बाद बाकायदा एंबुलेंस से उसे घर छोड़ा जाता है.

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इलाज के दौरान उठाते हैं पूरी जिम्मेदारी
अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मचारी दिलचंद लदेर को पहाड़ी कोरवा डेस्क का नोडल अधिकारी बनाया गया है, जिनकी देख-रेख में पहाड़ी कोरवा मरीज का उपचार व रहने खाने की व्यवस्था की जाती है. उन्होंने बताया कि रात में भी अगर उन्हें पहाड़ी कोरबा मरीज के अस्पताल पहुंचने की सूचना मिलती है, तो वे मौके पर पहुंचते हैं और उसकी पूरी जिम्मेदारी उठा लेते है. मरीज के भर्ती होने से उसके ठीक होने तक वो उनकी देखरेख में होता है और इलाज हो जाने के बाद उसे एंबुलेंस से घर भेजा जाता है.

Tags: Chhattisagrh news, Health, Korba news, Local18



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