Tuesday, February 10, 2026
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किसान भाइयों! पूसा ने तैयार किया ऐसा चावल, पकने पर खुशबू फैलेगी आसपास, पैदावार भी बंपर, यहां मिलेगा बीज


Pusa Narendra kala namak. चावल की बाजार में तरह तरह की किस्‍में हैं, अलग-अलग गुणों की वजह से जाने जाते हैं. ऐसा ही एक चावल है जिनका काला नमक. इसकी खुशबू खूब होती है और खाने में स्‍वादिष्‍ट होता है. लेकिन इसकी कीमत 150 रुपये के आसपास होती है. इसका कारण पैदावार कम होना है. यह कहना गलत न होगा कि मांग के अनुसार इसकी आपूर्ति नहीं हो पाती है. इसी को ध्‍यान में रखते हुए पूसा ने इसी तरह दो चावल तैयार किए हैं. जो स्‍वाद और खुशबू में काला नमक चावल जैस होंगे. यह चावल भी उन्‍हीं इलाकों में उगाया जा सकता है जहां काला नमक चावल पहले से पैदा हो रहा है.

काला नमक चावल पूर्वी उत्‍तर प्रदेश के 11 जिलों में ही पाया जाता है, जो यही की जलवाऊ और मिट्टी में ही पैदा होता है. इसे भगवान बुद्ध का प्रसाद माना जाता है. यह चावल खुशबू के लिए विश्‍व भर में प्रसिद्ध है. लेकिन इसकी पैदावार प्रति हेक्‍टेयर 1.5 से 2 टन ही है. पूसा इसकी पैदवार बढ़ाने के लिए इस दिशा में पिछले 15-16 वर्षों से काम कर रहा था, जिससे हाल ही सफलता मिली है.

इंडियन एग्रीकल्‍चर रिसर्च इंस्‍टीट्यूट (आरएआरआई-पूसा) के निदेशक डा. एके सिंह ने बताया कि पूसा ने इसकी दो किस्‍में तैयार की हैं.

इंडियन एग्रीकल्‍चर रिसर्च इंस्‍टीट्यूट (आरएआरआई-पूसा) के निदेशक डा. एके सिंह ने बताया कि पूसा ने काला नमक चावल पर 2008 से लगातार काम कर रहा है. सफलता मिल गयी है और दो किस्‍में पूसा नरेन्‍द्र काला नमक एक और सीआरडी काला नमक दो तैयार कीं गयी हैं. इन दोनों किस्‍मों की पैदावार प्रति हेक्‍टेयर 4.5 से 5 टन तक है. और स्‍वाद और खुशबू भी वैसी है. क्‍योंक‍ि ये किस्‍म भी पूर्वी उत्‍तर प्रदेश की उसी जलवाऊ और मिट्टी के लिए तैयार की गयी है. इन्‍हीं इलाकों में इनकी टेस्टिंग भी हो चुकी है. दोनों किस्‍में पिछले वर्ष रिलीज हो चुकी हैं. इस वर्ष पहली बार किसानों को सीमित मात्रा में इसका बीज मिलेगा. उन्‍होंने बताया कि अगले वर्ष ये बीज भरपूर मात्रा में मिल सकेगा.

यह है खासियत

सामान्‍य काला नमक चावल का बीज काफी लंबा होता है जो पकने के बाद गिर जाता है. इस तरह पैदावार कम होती है. लेकिन पूसा द्वारा विकसित किए गए चावल की लंबाई 1 मीटर से भी कम है जो पकने के बाद नहीं गिरेगा. साथ ही इनमें बीमारी लगने की आशंका कम होगी. सिद्धार्थ नगर के काला नमक पैदा करने वाले कृषक अमृतांश मिश्रा बताते हैं कि अगर पूसा के नए बीच से चावल की पैदावार बढ़ेगी तो यह यहां के किसानों के लिए बहुत अच्‍छा होगा. पैदावार कम होने की वजह से अभी तक कुछ ही किसान बोते थे लेकिन ज्‍यादातर किसान बो सकेंगे और मांग के अनुसार आपूर्ति भी की जा सकेगी.

इन जिलों की जलवाऊ में होता है

बस्ती, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर, बलरामपुर, गोंडा ,गोरखपुर, श्रावस्‍ती, महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया,बहराइच,

किसान यहां से ले सकते हैं बीज

1- कृषि विज्ञान केन्‍द्र, बस्‍ती
2- कृषि विज्ञान केन्‍द्र, सिद्धार्थ नगर
3- कृषि विज्ञान केन्‍द्र,चौकीमाफी, गोरखपुर

अगर किसी किसान को बीज लेने में परेशानी हो तो डा. मार्कंडेय 9835895486 सीधा संपर्क कर सकता है.

Tags: Agriculture, UP news



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