सनन्दन उपाध्याय/बलिया: आपने सुना होगा कि शुगर के मरीजों के लिए चावल खाना बड़ी समस्या को दावत देने से कम नहीं होता. लेकिन आज हम उस चावल के बारे में बात करेंगे जो शुगर के मरीजों के लिए काफी लाभप्रद है. यही नहीं यह चावल मोटापा, कोलेस्ट्रॉल और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में बेहद लाभकारी और फायदेमंद है. विशेषज्ञों के मुताबिक इस चावल की एक नहीं बल्कि तमाम औषधीय लाभ है. इसकी खेती भी एक तरह से कहें तो चमत्कारिक होती है. अचानक अगर पानी बढ़ गया तो इसके पौधे भी पानी से ऊपर चले जाते हैं. इसको कहते हैं तिन्ना, तिन्नी, लाल या बसई का चावल. इसकी बाली और चावल भी लाल होते हैं. यह बाजार में काफी महंगा बिकता है. इसकी खेती इतनी सुरक्षित होती है कि अगर अचानक पानी बढ़ जाए तो भी इसका कुछ बिगाड़ नहीं पाता है. इसकी खेती कर किसान निश्चित रूप से मालामाल बन सकते हैं.
आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन के विशेषज्ञ प्रोफेसर बृजेश सिंह बताते हैं कि यह एक किसानों के लिए काफी लाभकारी और मालामाल कर देने वाली फसल है. इसके एक नहीं बल्कि अनेकों औषधीय लाभ है. इस चावल को खाने से शुगर, मोटापा, कोलेस्ट्रॉल और यहां तक की कैंसर भी कंट्रोल हो जाता है. श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन (Genetics & Plant Breeding) विभाग के प्रोफेसर बृजेश सिंह ने बताया कि हमारा विभाग लगभग 20 साल से पौधों पर शोध कर रहा है इसमें खास तौर से एक ऐसी फसल पर सफ़लता मिली है जिसकी खेती करके किसान मालामाल बन सकते हैं. हमारे जनपद में स्थित गोखुर झील सुरहा ताल के काली मिट्टी पर अपने आप प्राकृतिक रूप से एक चावल होता है जिसे बलिया में तिन्ना का चावल, तिन्नी का चावल, लाल चावल या पसई चावल भी कहते हैं. इस पौधे में जैसे ही पानी भरता है वैसे ही एक तरह से कहा जाए तो यह अपना चमत्कार दिखाने लगता है. अगर आप भी इसका खेती करना चाहते हैं तो आपके पास 2 महीने का समय है अपनी पूरी तैयारी कर ले निश्चित रूप से यह फसल आपको मालामाल बना सकती है. बरसात से पहले ही इसकी खेती शुरू कर देनी है.
इस प्रकार से होती है इसकी खेती…
लगभग 15 किलो बीज 1 एकड़ भूमि के लिए पर्याप्त होता है और एक एकड़ में 15 से 20 क्विंटल तक इसका उत्पादन किया जा सकता है. इसका चावल और बाली दोनों लाल होते हैं. यह बाढ़ वाले क्षेत्र में भी संपन्न होने वाली खेती है. इसका पानी कुछ नहीं बिगाड़ पाता है. जितना पानी बढ़ेगा उतना यह भी बढ़ जाएगा. इसकी कटाई पानी नाव से की जा सकती है. क्योंकि अचानक पानी काफी बढ़ जाए तो यह पानी में डूबती नहीं बल्कि पानी से भी ऊपर हो जाती है. इस कारण इसकी कटाई और बुवाई बाढ़ वाले क्षेत्र में भी काफी आसानी से संपन्न होती है.
इन तमाम बीमारियों में लाभकारी, व्रत में भी सेवन…
इस चावल का सेवन व्रत में भी किया जाता है. इसके अलावा इस चावल के अनेकों औषधीय लाभ भी होते हैं. इस चावल की सबसे बड़ी विशेषता होती है कि इसमें आयरन, मैग्नीशियम और कैल्शियम का उत्तम स्रोत है. इसके कारण यह खून के कमी (एनीमिया) को भी दूर करता है. यह हड्डियों को काफी मजबूत बनाने में सहायक होता है. इसमें फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है इस कारण यह कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम कर मोटापा को घटाता है. यह शुगर के रोगियों के लिए भी काफी लाभकारी चावल है.
कैंसर में भी कारगर
इसमें एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो शरीर में बनने वाले कोशिकाओं को भी नियंत्रित करते है इसमें एंटी कैंसरस प्रॉपर्टी भी होती है जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से मुक्ति दिलाती है. इसकी ऊंचाई डेढ़ मीटर से 4 मीटर तक होती है. अधिकतर देखा जाता है कि जो अन्य धान की फसल ज्यादा पानी लग लगने के कारण बर्बाद हो जाती है वहां यह बड़े आसानी के साथ संपन्न होने वाली खेती है. जैसे-जैसे पानी बढ़ता है वैसे-वैसे इसकी ऊंचाई भी बढ़ जाती है इसलिए पानी इस फसल का कुछ बिगाड़ नहीं पाती है. इसकी एक जय सूरिया प्रजाती की चावल होती है जो बलिया के लिए काफी फेमस और मशहूर है. इसके अलावा भी कई प्रजाति है जिसकी खेती भी बलिया में हो सकती है.
मालामाल कर देगी फसल…
यह साधारण सी बात है कि जब एक एकड़ में 15 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है और एक एकड़ में कम से कम 15 से 20 क्विंटल इस चावल का उत्पादन किया जा सकता है. यह चावल बाजार में कम से कम 100 से 150 रुपया किलो मिलता है. अगर ₹100 किलो के हिसाब से बात करें तो एक एकड़ में लगभग दो लाख रुपये कि कमाई हो सकती है.
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Tags: Diabetes, Health, Local18
FIRST PUBLISHED : February 16, 2024, 12:17 IST
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