इन दिनों किसान आंदोलन की चर्चा चहुं ओर है. किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली की ओर कूंच कर रहे हैं. सिंधू बॉर्डर, शंभू बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर सहित दिल्ली की तमाम सीमाओं पर लंबा-लंबा जाम लगा हुआ है. किसान फसलों के समर्थन मूल्य की गारंटी को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. हालांकि, सरकार किसानों के हित में लगातार फैसले ले रही है. मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में ऐसी अनेक योजनाएं शुरू कीं, जिनकी वजह से किसानों की आमदनी पर सीधा-सीधा असर पड़ा है. मोदी सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुना करने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कई योजनाएं शुरू की थीं. उन योजनाओं का असर किसानों के जीवन स्तर पर साफ-साफ देखने को मिल रहा है.
केंद्र सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए किसान सम्मान योजना, कृषि बीमा योजना, पशुधन योजना, मत्स्य पालन योजना, दुग्ध उत्पादन योजना, किसान उत्पादक संगठन सहित अनेक योजनाएं चलाई हुई हैं. यहां हम इन योजनाओं पर विस्तार से चर्चा कर रहे हैं.
पीएम किसान सम्मान योजना (PM KISAN)
प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना 24 फरवरी, 2019 को शुरू की गई थी. इसका मकसद किसानों को प्रत्यक्ष तौर पर आर्थिक मदद देना. पीएम किसान सम्मान निधि के तहत किसानों को हर साल 2-2 हजार रुपये की तीन किस्तों में 6,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है. पैसा किसानों के खाते में सीधे जमा किया जाता है. देश के लभग 11 करोड़ किसानों को लगभग 2.81 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जाते हैं.
प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PM KMY)
पीएम किसान मानधन योजना 12 सितंबर, 2019 को शुरू की गई थी. इसका मकसद किसानों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है. इस योजना में लघु और सीमांत किसानों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए पेंशन योजना शुरू की गई है. 18 से 40 वर्ष तक की आयु वाले किसान इस योजना में आते हैं. इसमें किसानों से उम्र के हिसाब से 55 से लेकर 200 रुपये का बीमा प्रीमियम लिया जाता है और बदले में 60 साल की आयु पर हर महीने 3000 रुपये बतौर पेंशन दिए जाते हैं. किसान मानधन योजना में भारतीय जीवन बीमा निगम-एलआईसी के तहत सुरक्षा प्रदान की जाती है.
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना वर्ष 2016 में शुरू की गई थी. इस योजना के तहत कुदरती आपदा के चलते फसल को होने वाले नुकसान की एवज में किसान को आर्थिक मदद दी जाती है. बीमा योजना में फसल बोआई से लेकर कटाई तक के रिस्क कवर किए जाते हैं. रबी और खरीफ सीजन पर फसलों का बीमा किया जाता है.
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संशोधित ब्याज सहायता योजना
केंद्र सरकार सस्ती दरों पर किसानों को कृषि ऋण मुहैया कराती है. इसके लिए किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड योजना शुरू की गई थी, ताकि खेती-किसानी से संबंधित कामों के लिए किसान लोन ले सके. इसके लिए किसानों को बहुत कम ब्याज दर पर कृषि लोन दिया जाता है. भारत सरकार ने ब्याज अनुदान योजना (आईएसएस) शुरू की थी. अब इसे संशोधित ब्याज अनुदान योजना (एमआईएसएस) कहा जाता है. इस योजना में किसान को तीन लाख रुपये तक का एग्रीकल्चर लोन दिया जाता है. इस पर 7 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज लिया जाता है. अगर कोई किसान समय पर इस ऋण को चुका देता है तो उसे 3 प्रतिशत तक की ब्याज में छूट दी जाती है. इस तरह किसान को 4 प्रतिशत की दर पर तीन लाख रुपये तक का लोन मिल जाता है.
कृषि अवसंरचना कोष योजना
कृषि सेक्टर में विकास में तेजी लाने के लिए सरकार ने एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड तैयार किया है. फसल की कटाई के बाद से लेकर उसके सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था के लिए इस फंड से आर्थिक मदद दी जाती है. एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड स्कीम के तहत कोल्ड स्टोरेज बनाने, प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना, वेयरहाउस, पैकेजिंग यूनिट की स्थापना आदि के लिए किसानों को 2 करोड़ रुपये तक का लोन दिया जाता है. इस योजना में 2 करोड़ रुपए तक के लोन पर अधिकतम 7 साल तक ब्याज में 03 प्रतिशत तक की छूट दी जाती है.
कृषि अवसंरचना कोष योजना का उद्देश्य किसानों, कृषि उद्यमियों, किसान उत्पादक संगठन, स्वयं सहायता समूह आदि को फसल कटाई के बाद के कामों- पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट के लिए ऋण दिया जाता है.
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FIRST PUBLISHED : February 21, 2024, 12:49 IST


