Sunday, February 8, 2026
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Carbon Neutral Farm know how it is beneficial for farming in hindi


Carbon Neutral Farm Benefits: समय के साथ-साथ खेती बाड़ी के तरीकों में भी काफी बदलाव हुए हैं. अब कार्बन न्यूट्रल फार्मिंग को भी इस्तेमाल में लाया जा रहा है. कार्बन न्यूट्रल फार्मिंग रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के इस्तेमाल को कम करता है. जोकि फसलों के लिए खतरनाक हो सकते हैं. इसके अलावा ये मिट्टी की उर्वरता और बायोडायवर्सिटी को बढ़ाता है, जो अच्छी फसलों के लिए बेहद जरूरी है.

केरल के कोच्चि शहर में स्थित थुरुथ आइलैंड एलुवा स्टेट सीड फार्म के नाम से जाना जाता है. ये भारत का पहला कार्बन न्यूट्रल सीड फार्म है. यहां किसी भी प्रकार के रसायनों का उपयोग नहीं होता है. 13.5 एकड़ में फैले इस फार्म तक केवल नाव, बोट या रेलवे ट्रैक से ही पहुंचा जा सकता है. कोई भी वाहन इस फार्म में प्रवेश नहीं कर सकता. ये जगह पेरियार नदी से घिरी हुई है.

कार्बन न्यूट्रल ही नहीं…

जमीन के ऊपर कार्बन उत्सर्जन को रोकने और बेअसर करने के लिए खेत की सीमाओं में 150 से अधिक पेड़-पौधों की खेती होती है. केरल सरकार ने राज्य के सभी 14 जनपदों में कार्बन न्यूट्रल सीड फार्म बनाने की योजना बनाई है. एलुवा स्टेट सीड फार्म की प्रमुख, लिसिमोल जे वडुक्कूट बताती हैं कि हमारे फार्म में 43 टन कार्बन उत्सर्जन होता है. लेकिन यह 213 टन कार्बन खुद स्टोर करता है. इसका मतलब है कि यहां 170 टन कार्बन क्रेडिट है. यह सिर्फ कार्बन न्यूट्रल ही नहीं बल्कि कार्बन निगेटिव है.

हमने इस फार्म में कई नई फार्मिंग तकनीकें अपनाई हैं. इससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है. डक-पैडी इंटीग्रेटेड फार्मिंग तकनीक भी पेश की है. धान रोपाई के 15 दिन बाद हम बत्तखों को खेत में छोड़ देते हैं. भोजन की तलाश में बत्तखें मिट्टी में चोंच मारती हैं, जिससे पानी को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है.

प्राकृतिक तरीकों को बढ़ावा

कार्बन न्यूट्रल फार्मिंग में प्राकृतिक तरीकों से मिट्टी की उर्वरता और फसलों की सुरक्षा को बढ़ावा दिया जाता है. कार्बन न्यूट्रल फार्म में कई प्रकार की फसलों और पौधों को उगाया जाता है, जोकि प्राकृतिक कीट नियंत्रण और मिट्टी की उर्वरता में सुधार करने में मदद करते हैं. इसमें जैविक कचरे को खाद में बदलकर मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

हैं कई फायदे

ये जलवायु परिवर्तन को कम करने में मदद करता है. इससे मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है. साथ ही ये जैव विविधता को भी बढ़ावा देता है. ये उत्पादन लागत को कम करने में भी मददगार है.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. किसान भाई, किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

यह भी पढ़ें- खेती नहीं करते, मगर गांव में पड़ी है जमीन… जानिए उन प्लान के बारे में, जिनसे हर महीने आने लगेंगे पैसे



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