मुस्लिमा छात्रा ने आरोप लगाया था कि स्कूल के प्रतिबंध उसके धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन हैं और यह एक प्रकार का भेदभाव है जो धार्मिक अल्पसंख्यकों को समाज से अलग-थलग महसूस कराता है।
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स्कूल में नहीं पढ़ सकते नमाज, धार्मिक अधिकार से ऊपर स्कूली नियम; कोर्ट ने ठुकराई मुस्लिम छात्रा की फरियाद
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