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डायरेक्ट्रेट ऑफ एजुकेशन (DoE) ने बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला लिया है, उन छात्रों के लिए जो फेल होने पर स्कूल की पढ़ाई छोड़ देते हैं। डायरेक्ट्रेट ऑफ एजुकेशन (DoE) ने सभी सरकारी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि जो छात्र कक्षा नौवीं में शैक्षणिक वर्ष 2023-24 में फेल हो गए हैं, वे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) में 2024-25 में जरूर एडमिशन लें।
डायरेक्ट्रेट ऑफ एजुकेशन (DoE) ने यह फैसला इसलिए लिया है क्योंकि यह देखा गया है कि अगर छात्र दो बार नौवीं कक्षा में फेल हो जाते हैं, तो उन्हें रेगुलर स्कूल में एडमिशन नहीं मिलता है, जिसके कारण वे पढ़ाई छोड़ देते हैं। वे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) में एडमिशन नहीं कराते हैं। जिससे देश में ड्रॉप आउट छात्रों का प्रतिशत बढ़ रहा है। कम्प्यूटर सेल द्वारा जारी किए गए डेटा के अनुसार 2023-24 शैक्षणिक वर्ष में कक्षा नौवीं के 17,308 छात्र फेल हुए थे, जिनमें से सिर्फ 6,200 ने ही नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) में इस वर्ष एडमिशन लिया है।
डायरेक्ट्रेट ऑफ एजुकेशन (DoE) ने सभी सरकारी स्कूलों के प्रमुख को यह निर्देश दिया है कि वे ऐसे सभी छात्र जो दो बार नौवीं में फेल हुए हैं, उनके माता-पिता और छात्र को NIOS में एडमिशन लेने के लिए प्रेरित करें और उन्हें शिक्षा का महत्व समझाएं।
NIOS में एडमिशन लेने के बाद छात्र अपने मन पसंद के विषयों को चुनकर उनकी परीक्षा दे सकते हैं। और जब वे दो बाद दसवीं कक्षा को पास कर लेंगे तो वे दोबारा से रेगुलर स्कूल में अपना एडमिशन करा सकते हैं। डायरेक्ट्रेट ऑफ एजुकेशन (DoE) का इस निर्णय के पीछे यह उद्देश्य है कि ज्यादा से ज्यादा बच्चे शिक्षा प्राप्त करें और भविष्य उच्च स्तरीय शिक्षा के लिए अप्लाई करें। अक्सर छात्र फेल होने पर स्कूल और पढ़ाई छोड़ देते हैं, जिससे वे दसवीं तक भी पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। फिर उन्हें भविष्य में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है, इसलिए छात्रों का भविष्य सुनहरा और बेहतर करने के लिए यह अहम कदम उठाया गया है।


