लेबनान में हुए पेजर धमाके की घटना दुनिया भर में सुर्खियों में है। इस घटना के तार दुनिया के कई देशों से जुड़ते नजर आ रहे हैं। अब 49 साल की एक विदेशी महिला भी इस घटना के केंद्र में नजर आ रही है।
लेबनान में हुए पेजर धमाके की घटना दुनिया भर में सुर्खियों में है। इस घटना के तार दुनिया के कई देशों से जुड़ते नजर आ रहे हैं। अब 49 साल की एक विदेशी महिला भी इस घटना के केंद्र में नजर आ रही है। यह महिला का नाता इटली और हंगरी से है। इस महिला का नाम क्रिस्टियाना बार्सोनी। वह बुडापेस्ट की बीएसी कंसल्टिंग में सीईओ हैं। क्रिस्टियाना की कंपनी के संबंध ताइवानी फर्म गोल्ड अपोलो से हैं, जिसके नाम का इस्तेमाल उन पेजर्स में हुआ था, जिन्हें लेबनान में धमाके के लिए इस्तेमाल किया गया।
अब पिछले कुछ दिनों से क्रिस्टियाना को बेनामी धमकियां मिल रही हैं। इसके बाद हंगरी की सीक्रेट सर्विस एजेंसीज ने उन्हें मीडिया से बात करने के लिए मना कर दिया है। इस बात की जानकारी क्रिस्टियाना की मां ने मीडिया को दी है। उनकी मां ने कहा कि मेरी बेटी का पेजर धमाके से कुछ भी लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पेजर बुडापेस्ट से होकर नहीं जाते, न ही हंगरी में इन्हें बनाया जाता है। हंगरी की सरकार ने भी इस हफ्ते की शुरुआत में ऐसा ही दावा किया था।
क्रिस्टियाना का जन्म सिसिली में हुआ था। वह कैटानिया में पली-बढ़ीं, जहां उनके पिता नौकरी करते थे और मां हाउसवाइफ थीं। उन्होंने पास के स्कूल से पढ़ाई की और उन दिनों एक शांत रहने वाली लड़की थीं। हालांकि क्रिस्टियाना की एकेडमिक उपलब्धियां काफी प्रभावशाली हैं। 2000 की शुरुआत में उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से पार्टिकल फिजिक्स में पीएचडी की थी। हालांकि उन्होंने वैज्ञानिक करियर नहीं अपनाया। यूसीएल में उनके प्रोफेसरों में से एक एकोस टोरोक के मुतबिक उसने तब से कोई साइंटिफिक काम नहीं किया है।
बार्सोनी-आर्किडियाकोनो का निजी जीवन भी बेहद दिलचस्प है। वह बुडापेस्ट में एक अपार्टमेंट की मालकिन हैं, जिसमें उनके पेस्टल ड्राइंग्स हैं। पिछले दो साल से इमारत में रहने वाले एक पड़ोसी ने उसे दयालु और मिलनसार बताया। पेजर हमलों के बाद से, बार्सोनी-आर्किडियाकोनो सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं पड़ी हैं। पड़ोसियों ने भी इस बात की पुष्टि की है।
हंगरी सरकार ने कहा है कि बीएसी कंसल्टिंग एक ‘ट्रेडिंग-इंटरमीडियरी कंपनी’ थी, जिसकी देश में कोई मैन्यूफैक्चरिंग साइट नहीं थी। इसके अलावा पेजर कभी हंगरी नहीं गए थे। हालांकि, विवाद में बार्सोनी-आर्किडियाकोनो की भूमिका स्पष्ट नहीं है, और उसने हमलों के बाद से कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है।


