Custom Duty Ended On Ammonium Nitrate: ईरान और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने ग्लोबल सप्लाई चेन की कमर तोड़ दी है. जिसका सीधा असर खाद और खेती से जुड़ी चीजों पर पड़ने का डर था. ऐसे नाजुक वक्त में भारत सरकार ने मास्टरस्ट्रोक खेलते हुए अमोनियम नाइट्रेट समेत 40 से ज्यादा पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर कस्टम ड्यूटी यानी आयात शुल्क को पूरी तरह खत्म कर दिया है. नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत ग्रीन अमोनिया की सप्लाई के लिए 11 बड़े समझौते भी किए गए हैं.
जिससे विदेशी बाजारों की अस्थिरता का असर हमारे खेतों तक न पहुंचे. सरकार का यह फैसला 2 अप्रैल 2026 से लागू होकर 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा. जो सीधे तौर पर किसानों की जेब को राहत देने वाला है. जानें इससे किसानों को कैसे मिलेगा फायदा.
अमोनियम नाइट्रेट पर खत्म हुई कस्टम ड्यूटी
अमोनियम नाइट्रेट खाद बनाने के लिए सबसे जरूरी कच्चा माल है और विदेशी तनाव की वजह से इसके दाम आसमान छूने लगे थे. अब इंपोर्ट ड्यूटी और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर सेस हटने से फर्टिलाइजर कंपनियों की लागत में भारी कमी आएगी. जिसका सीधा फायदा किसानों को सस्ती खाद के रूप में मिलेगा. जब इनपुट कॉस्ट कम होगी.
तो खेती की कुल लागत भी घटेगी जिससे किसानों का प्रॉफिट मार्जिन भी बढ़ेगा तय है. जो किसान खाद की बढ़ती कीमतों से परेशान रहते थे. सरकार ने टैक्स का बोझ हटाकर उन किसानों को बढ़ी राहत दी है.
- ड्यूटी और सेस हटने से फर्टिलाइजर कंपनियों का प्रोडक्शन खर्च कम होगा.
- किसानों को मार्केट में अब पहले के मुकाबले काफी किफायती रेट पर खाद मिल सकेगी.
- खेती की ओवरऑल लागत कम होने से किसानों की शुद्ध कमाई में इजाफा होगा.
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जानें अब किसानों को कैसे होगा फायदा?
मिडिल ईस्ट में मचे घमासान की वजह से कच्चे माल की सप्लाई रुकने का खतरा मंडरा रहा था. जिससे ऐन वक्त पर खाद की किल्लत हो सकती थी. सरकार के इस नए फैसले और ग्रीन अमोनिया के लिए किए गए लॉन्ग-टर्म समझौतों ने इस डर को खत्म कर दिया है. अब देश के भीतर कच्चे माल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी.
जिससे फर्टिलाइजर प्लांट बिना रुके काम कर पाएंगे. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि पीक सीजन के दौरान किसानों को खाद के लिए लंबी लाइनों में नहीं लगना पड़ेगा और न ही ब्लैक मार्केटिंग का सामना करना होगा. यह एक प्रो-एक्टिव मैनेजमेंट है जो अंतरराष्ट्रीय संकटों के बीच भी हमारे घरेलू एग्री-मार्केट को स्टेबल और मजबूत बनाए रखेगा.
- कच्चे माल पर टैक्स हटने से इंपोर्ट आसान होगा और स्टॉक की कमी नहीं होगी.
- ग्रीन अमोनिया के समझौतों से खाद सेक्टर में आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत होगी.
- सीजन के दौरान खाद की अचानक होने वाली किल्लत या देरी का रिस्क अब खत्म हो जाएगा.
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