Tuesday, April 7, 2026
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यूपी में कितने केंद्रों पर MSP पर हो रही रबी फसलों की खरीद? जानें चना-मसूर और अरहर की नई दरें


Rabi MSP Centres: उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए रबी सीजन की फसलों की कमाई को लेकर जबरदस्त अपडेट आया है. योगी सरकार ने प्रदेश में चना, मसूर, अरहर और सरसों की सरकारी खरीद (MSP) का बिगुल फूंक दिया है. जिससे अब अन्नदाताओं को अपनी उपज औने-पौने दामों में बिचौलियों को बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने साफ किया है कि 2 अप्रैल से शुरू होकर यह खरीद प्रक्रिया 30 जून 2026 तक पूरे जोर-शोर से चलेगी.

सरकार किसानों को उनकी मेहनत का हक दिलाकर मार्केट के उतार-चढ़ाव से उन्हें पूरी तरह सुरक्षित करना चाहती है. इसके लिए व्यवस्था को हाई-टेक और पारदर्शी बनाया गया है कि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए न तो लंबी लाइनों में लगना होगा और न ही पेमेंट के लिए हफ्तों इंतजार करना पड़ेगा. जानें इस बार कितने केंद्रों पर MSP पर हो रही रबी की फसलों की खरीद.

क्या हैं फसलों के नए रेट?

इस साल सरकार ने रबी की मुख्य फसलों के लिए काफी आकर्षक एमएसपी (MSP) तय की है, जो सीधे किसानों के बैंक खातों में खुशहाली लाएगी. दालों और तिलहन पर फोकस करते हुए सरकार ने खरीद के लक्ष्य भी काफी ऊंचे रखे हैं जिससे ज्यादा से ज्यादा किसानों को इसका सीधा फायदा मिल सके.

  • चने का सरकारी रेट 5875 रुपये, मसूर 7000 रुपये और सरसों 6200 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है.
  • सबसे ज्यादा डिमांड वाली अरहर (तुअर) की खरीद 8000 रुपये प्रति क्विंटल के शानदार भाव पर की जा रही है.
  • सरकार ने लाखों मीट्रिक टन फसल खरीदने का लक्ष्य रखा है ताकि मार्केट में कीमतों का बैलेंस बना रहे.

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190+ केंद्रों पर खरीद 

यूपी सरकार ने पूरी खरीद प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए जमीन पर पुख्ता इंतजाम किए हैं. पूरे प्रदेश में 190 से ज्यादा आधिकारिक क्रय केंद्र एक्टिव कर दिए गए हैं, जहाँ अत्याधुनिक मशीनों के जरिए पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है.

  • सभी केंद्रों पर आधार-लिंक्ड POS मशीनें लगाई गई हैं ताकि सही किसान की पहचान हो सके और गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे.
  • फसल की तौल होते ही डीबीटी (DBT) के जरिए पैसा सीधे किसान के आधार-लिंक्ड बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करने की व्यवस्था है.
  • जरूरत पड़ने पर विभिन्न सरकारी एजेंसियां एक्सट्रा मोबाइल सेंटर भी चलाएंगी जिससे दूर-दराज के किसानों को सहूलियत हो.

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