hemorrhagic septicemia: मौसम बदलने के साथ ही बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. मौसम बदलने पर जिस तरह इंसानों में बीमारियां बढ़ने लगती है, वैसे ही पशुओं में भी इसका असर देखने को मिलता है. खासकर गाय और भैंस पालने वाले पशुपालकों के लिए यह समय बहुत दिक्कत भरा होता है. मौसम बदलने के दौरान कई खतरनाक बीमारियां पशुओं में तेजी से फैलती है. इन बीमारियों में से एक गलघोटू बीमारी है, जिसे हेमोरेजिक सेप्टीसीमिया कहा जाता है. यह एक जीवाणु जनित संक्रामक रोग है, जो कुछ ही घंटे में पशुओं की जान ले सकता है. ऐसे में समय पर इसकी पहचान और बचाव बहुत जरूरी होता है.
क्या है गलघोटू बीमारी?
गलघोटू एक गंभीर बैक्टीरियल इंफेक्शन है जो आमतौर पर गाय और भैंसों को प्रभावित करता है. यह बीमारी पोस्टुरल मल्टोसिडा नामक बैक्टीरिया से फैलती है, जो नमी और गंदगी वाले एनवायरमेंट में तेजी से एक्टिव हो जाते हैं. वहीं मानसून के दौरान यह रोग तेजी से फैलता है और संक्रमित पशुओं के संपर्क, लार, नाक के स्राव या दूषित पानी और चारे के जरिए दूसरे पशुओं तक पहुंच जाता है. इस बीमारी की सबसे खतरनाक बात यह है कि इसके लक्षण अचानक दिखाई देते हैं और बहुत कम समय में स्थिति गंभीर हो जाती है. कई मामलों में 12 से 14 घंटे के अंदर ही पशु की मौत हो जाती है. इससे मृत्यु दर भी काफी ज्यादा मानी जाती है, इसलिए इसे पशुपालकों के लिए सबसे खतरनाक बीमारियों में गिना जाता है.
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गलघोटू बीमारी के लक्षण
गलघोटू से संक्रमित पशुओं में अचानक तेज बुखार आ जाता है. इसके बाद गले और गर्दन में सूजन दिखाई देती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है. पशु सुस्त हो जाता है, खाना-पीना छोड़ देता है और मुंह से ज्यादा लार गिरने लगती है. आंख लाल हो जाती है और कई बार पेट फूलने जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती है. इस बिमारी की खतरनाक कंडीशन में पशु गिर जाते हैं और उनकी मृत्यु भी हो सकती है.
टीकाकरण ही गलघोटू से सबसे बड़ा बचाव
एक्सपर्ट्स के अनुसार इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका समय पर टीकाकरण है. पशुओं को पहली बार 6 महीने की उम्र में टीका लगाया जाना चाहिए और इसके बाद हर साल बूस्टर डोज देना जरूरी होता है. मानसून शुरू होने से पहले यानी मई-जून में टीकाकरण कराना सबसे बेहतर माना जाता है. ताकि बारिश के मौसम में पशु सुरक्षित रहे सके. इस रोग से बचाव के लिए ऑयल एडजुवेंट वैक्सीन और आलम ट्रीटेड वैक्सीन का इस्तेमाल किया जाता है, जो अलग-अलग समय तक सुरक्षा प्रदान करते हैं.
किन पशुओं को टीका लगवाना जरूरी?
गलघोटू का टीका मुख्य रूप से गाय और भैंसों को लगाया जाता है. हालांकि कई प्रभावित क्षेत्रों में भेड़ और बकरी का भी टीकाकरण कराया जा सकता है, ताकि इन्फेक्शन को कम किया जा सके. टीकाकरण के साथ-साथ कुछ सावधानियां भी बरतना जरूरी होता है. जैसे बीमार पशु को अलग रखें ताकि संक्रमण न फैले, पशुशाला को साफ और सूखा रखें, क्योंकि नमी और गंदगी से बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं. वही मृत पशु को खुले में छोड़ने के बजाय गड्ढे में दबाना चाहिए.
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