Cows For Dairy Farming: गांवों में आजकल खेती के साथ-साथ साइड इनकम का सबसे तगड़ा जरिया डेयरी बिजनेस बनकर उभरा है. अगर आप भी दूध का कारोबार शुरू करने की सोच रहे हैं. तो सबसे जरूरी कदम है सही नस्ल की गाय का चुनाव करना. अक्सर लोग बिना रिसर्च के कोई भी गाय ले आते हैं और बाद में दूध कम होने या बीमारी की वजह से घाटा झेलते हैं.
देसी नस्ल की गायों की डिमांड इन दिनों मार्केट में बहुत ज्यादा है क्योंकि इनका दूध सेहत के लिए बेस्ट माना जाता है और इनके रखरखाव का खर्चा भी विदेशी नस्लों के मुकाबले काफी कम होता है. अगर आप गिर, लाल सिंधी या साहीवाल जैसी टॉप क्लास नस्लों के साथ शुरुआत करते हैं. तो मुनाफा होने की गारंटी बढ़ जाती है.
गिर गाय
अगर आप गुजरात के गिर जंगलों से ताल्लुक रखने वाली इस नस्ल को अपने फार्म पर लाते हैं. तो समझ लीजिए कि मुनाफे की शुरुआत हो चुकी है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका शांत स्वभाव और भारी दूध उत्पादन है.
- यह गाय रोजाना करीब 8 से 10 लीटर तक दूध आसानी से दे देती है. जो एक छोटे बिजनेस के लिए बहुत बढ़िया स्टार्ट है.
- गिर गाय के दूध की शुद्धता की वजह से लोग इसे 100 से 120 रुपये प्रति लीटर तक की कीमत पर खुशी-खुशी खरीदते हैं.
इसका उभरा हुआ माथा और मुड़े हुए सींग इसकी पहचान को खास बनाते हैं. यह नस्ल बीमारियों से लड़ने में भी काफी स्ट्रॉन्ग होती है और भारतीय माहौल में खुद को बहुत जल्दी ढाल लेती है.
यह भी पढ़ें: घर के किचन गार्डन में उगानी है बढ़िया मिर्च, इस वैरायटी के बीच रहेंगे बेस्ट
लाल सिंधी
दूध के बिजनेस में अक्सर गर्मी के मौसम में उत्पादन गिर जाता है. लेकिन लाल सिंधी गाय इस समस्या का सबसे बेस्ट समाधान है. यह गाय तपती गर्मी में भी अपना दूध उत्पादन कम नहीं होने देती.
- राजस्थान और हरियाणा जैसे गर्म इलाकों के लिए यह नस्ल किसी वरदान से कम नहीं है. क्योंकि इसे मौसम की मार का फर्क नहीं पड़ता.
- इसकी लाल चमकदार त्वचा और गठीला शरीर इसे कम देखभाल में भी फिट रखता है. जिससे डॉक्टर और दवाइयों का खर्च काफी बचता है.
यह रोजाना 8 से 10 लीटर दूध देती है. अगर आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहाँ टेम्परेचर काफी हाई रहता है. तो लाल सिंधी पर भरोसा करना आपके लिए घाटे का सौदा नहीं होगा.
साहीवाल
साहीवाल को भारत की सबसे दुधारू देसी नस्ल माना जाता है. अगर आप बड़े पैमाने पर दूध की सप्लाई करना चाहते हैं. तो साहीवाल से बेहतर कोई और विकल्प मार्केट में मौजूद नहीं है.
- यह नस्ल रोजाना 10 से 16 लीटर तक दूध दे सकती है, और एक पूरे ब्यांत में यह 2000 से 3000 लीटर का आंकड़ा आराम से छू लेती है.
- इतनी ज्यादा पैदावार के बावजूद इसे बहुत ज्यादा महंगे चारे की जरूरत नहीं होती. यह घास और चारे पर भी अच्छी परफॉरमेंस देती है.
इसकी ढीली त्वचा और लाल-भूरा रंग इसकी असली पहचान है. सही खान-पान और साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए. तो साहीवाल आपके डेयरी बिजनेस को बहुत जल्दी कामयाबी की नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है.
यह भी पढ़ें: PM Kisan Maandhan Yojana: इस योजना में किसानों को हर महीने मिलती है 3000 रुपये की पेंशन, बस करना होगा यह काम


