Summer Season Vegetables: अप्रैल और मई की झुलसाने वाली गर्मी जहां आम तौर पर फसलों के लिए चुनौती मानी जाती है. वहीं समझदार किसानों के लिए यही मौसम लॉटरी साबित हो सकता है. इस समय जब पारा आसमान छू रहा होता है. तब बाजार में ताजी हरी सब्जियों की भारी कमी हो जाती है. ऐसे में कद्दूवर्गीय सब्जियां जैसे तरोई, निनुआ और गिलकी उगाना एक मास्टरस्ट्रोक है.
ये फसलें न केवल तेज धूप को बर्दाश्त कर लेती हैं. बल्कि इन्हें बढ़ने के लिए भी भरपूर रोशनी की जरूरत होती है. अगर आपके पास सिंचाई का अच्छा इंतजाम है तो यह मौसम आपको मालामाल कर सकता है. जायद का यह सीजन बेल वाली सब्जियों के लिए सबसे अच्छा है. जान लीजिए कितनी हो सकती है इन सब्जियों से कमाई.
ये सब्ज़ियां रहेंगी बेस्ट
गर्मियों के इस सीजन में कद्दूवर्गीय यानी बेल वाली सब्जियों का कोई मुकाबला नहीं है. तरोई. निनुआ और गिलकी ऐसी फसलें हैं जो कम पानी में भी अच्छा सर्वाइवल दिखाती हैं और तेज लू को झेलने की क्षमता रखती हैं. बाजार में इनकी डिमांड इसलिए भी ज्यादा रहती है. क्योंकि ये सेहत के लिए हल्की और ठंडी मानी जाती हैं. एक्सपर्ट्स की मानें तो अप्रैल की बोनी वाली ये फसलें तब मार्केट में आती हैं. जब मंडियों में दूसरी हरी सब्जियों का अकाल होता है.
- लौकी और करेला भी इस मौसम के लिए बेहतरीन ऑप्शन हैं जो लगातार पैदावार देते हैं.
- ये फसलें कम समय में तैयार होकर किसानों को तुरंत कैश फ्लो देना शुरू कर देती हैं.
इन सब्जियों को उगाने से रिस्क कम और कमाई की गारंटी कहीं ज्यादा बढ़ जाती है.
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उगाते समय इन बातों का ध्यान दें
सब्जियों की बंपर पैदावार के लिए बुवाई की तकनीक पर ध्यान देना बहुत जरूरी है. बीजों को बोने से कम से कम 24 घंटे पहले पानी में भिगोकर रखें जिससे अंकुरण तेजी से हो. खेत तैयार करते समय गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट का इस्तेमाल मिट्टी की ताकत को कई गुना बढ़ा देता है. जिससे पौधों को जरूरी पोषण मिलता है. गर्मी को देखते हुए सिंचाई का एक फिक्स शेड्यूल बनाना चाहिए ताकि मिट्टी की नमी कभी खत्म न हो.
- बीजों को मिट्टी में लगभग एक से डेढ़ इंच गहरा ही दबाएं और नियमित अंतराल पर सिंचाई करें.
- बेलों को ऊपर चढ़ाने के लिए मचान का इस्तेमाल करें ताकि फल जमीन पर लगकर खराब न हों.
पौधों को फास्फोरस और पोटाश का सही डोज देने से उनकी इम्युनिटी मजबूत होती है और फल ज्यादा लगते हैं.
कमा सकते हैं इतना मुनाफा
कमाई के लिहाज से यह खेती आज के दौर का सबसे स्मार्ट बिजनेस मॉडल है. एक एकड़ में खेती की लागत करीब 25 से 35 हजार रुपये आती है जिसमें बीज. खाद और मजदूरी सब शामिल है. इसके बदले में आपको 60 से 100 क्विंटल तक की जबरदस्त उपज मिल सकती है. एक बार फसल तैयार होने पर आप लगातार 8 से 10 हफ्तों तक हर तीसरे दिन तुड़ाई करके मंडी में माल भेज सकते हैं.
- कम लागत और हाई रिटर्न की वजह से यह छोटे और सीमांत किसानों के लिए फायदे का सौदा है.
- ताजी सब्जियों की सीधी सप्लाई से आप बिचौलियों के बिना भी मोटा मुनाफा कमा सकते हैं.
सही मैनेजमेंट के साथ की गई यह खेती तपती गर्मी में आपकी जेब को गर्म रखेगी.
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