Soil Fertilizers Tips: आजकल अंधाधुंध केमिकल और फर्टिलाइजर्स के इस्तेमाल ने हमारी उपजाऊ मिट्टी की हालत खराब कर दी है. खेत धीरे-धीरे अपनी जान खो रहे हैं और बंजर होने की कगार पर पहुंच गए हैं. ऐसे में मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए ‘हरी खाद’ एक संजीवनी बूटी की तरह उभर कर आई है. यह कोई नया अविष्कार नहीं है, बल्कि हमारी पुरानी परंपरा का एक मॉडर्न और स्मार्ट वर्जन है.
हरी खाद का मतलब है ऐसी फसलें उगाना जो मिट्टी को जरूरी पोषक तत्व वापस लौटा सकें. जब हम ढैंचा या सनई जैसी फसलों को खेत में उगाकर उन्हें फूल आने से पहले ही मिट्टी में पलट देते हैं, तो वे मिट्टी के ऑर्गेनिक कार्बन लेवल को बूस्ट कर देती हैं. इससे न सिर्फ मिट्टी भुरभुरी होती है, बल्कि आने वाली फसलों की पैदावार भी जबरदस्त तरीके से बढ़ जाती है.
मिट्टी के गिरते ऑर्गेनिक लेवल के लिए हरी खाद
विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन का होना बहुत जरूरी है. जो आजकल तेजी से कम हो रहा है. जब मिट्टी में जान नहीं रहेगी. तो आप कितना भी महंगा यूरिया डाल लें. फसल अच्छी नहीं होगी. हरी खाद इस कमी को पूरा करने का सबसे सस्ता और टिकाऊ तरीका है.
- यह मिट्टी की जल धारण क्षमता यानी पानी सोखने की ताकत को बढ़ाती है.
- इसके इस्तेमाल से मिट्टी में मौजूद मित्र कीटों और सूक्ष्मजीवों की संख्या में इजाफा होता है.
यह प्रोसेस मिट्टी की ऊपरी परत को फिर से जीवित कर देती है जिससे फसलें और भी ज्यादा हेल्दी होती हैं.
यह भी पढ़ें: भयंकर गर्मी से पशुओं को बचाएंगे ये एक्सपर्ट टिप्स, दूध का उत्पादन भी नहीं होगा कम
कम लागत में दोगुनी पैदावार
हरी खाद का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह किसानों के खाद के खर्च को आधा कर देती है. जब आप ढैंचा या सनई जैसी दलहनी फसलों को मिट्टी में मिलाते हैं, तो वे हवा से नाइट्रोजन लेकर जमीन में फिक्स कर देती हैं. इससे अगली फसल को बाहर से बहुत कम खाद देनी पड़ती है.
- अगली फसल की बुवाई से करीब 45 से 50 दिन पहले हरी खाद की फसल उगाना सबसे सही रहता है.
- जब पौधों में फूल आने शुरू हों तब कल्टीवेटर चलाकर इन्हें मिट्टी में दबा देना चाहिए.
यह तरीका न केवल आपकी लागत घटाता है. बल्कि फसल की क्वालिटी को भी इतना शानदार बना देता है कि मार्केट में आपको बेहतरीन दाम मिलते हैं.
सस्टेनेबल फार्मिंग
लगातार धान और गेहूं के चक्र से मिट्टी की ताकत खत्म हो जाती है, जिसे ‘सॉयल फटीग’ भी कहते हैं. हरी खाद इस चक्र को तोड़कर मिट्टी को आराम और पोषण दोनों देती है. अगर आपकी जमीन में खारापन बढ़ रहा है या वह सख्त हो रही है, तो यह फॉर्मूला उसे फिर से उपजाऊ बनाने की पूरी गारंटी देता है.
- जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाने वाले किसानों के लिए हरी खाद पहला और सबसे जरूरी स्टेप है.
- इससे मिट्टी की बनावट में सुधार होता है जिससे जड़ों का विकास बहुत गहराई तक और तेजी से होता है.
अगर आप भी अपनी खेती की तस्वीर बदलना चाहते हैं और बंजर जमीन से सोना उगाना चाहते हैं, तो इस सीजन में हरी खाद को अपने खेत का हिस्सा जरूर बनाएं.
यह भी पढ़ें: बकरी फार्म डालना चाहते हैं, जानें किस नस्ल के बकरे देंगे सबसे ज्यादा मुनाफा?


