Drip Irrigation System Benefits : खेती में सबसे बड़ी चुनौती आज पानी की कमी है. बारिश पर निर्भर रहना या पारंपरिक सिंचाई का यूज करना अक्सर पानी की बहुत ज्यादा बर्बादी करता है. इसी समस्या को हल करने के लिए ड्रिप इरिगेशन एक बहुत ही आधुनिक और उपयोगी तरीका बनकर सामने आया है. इस तकनीक में पानी सीधे पौधों की जड़ों तक बूंद-बूंद करके पहुंचाया जाता है, जिससे जरूरत से ज्यादा पानी खर्च नहीं होता और हर पौधे को उतना ही पानी मिलता है जितना उसे चाहिए. ऐसे में अगर आपके पास 5 बीघा खेत है, तो यह जानना बहुत जरूरी हो जाता है कि ड्रिप इरिगेशन लगाने से आप कैसे पानी बचा सकते हैं. तो आइए जानते हैं कि 5 बीघा खेत में ड्रिप इरिगेशन से कितना पानी बचेगा और इससे आपकी खेती की लागत और उत्पादन पर क्या असर पड़ेगा.
ड्रिप इरिगेशन क्या है?
ड्रिप इरिगेशन एक ऐसी सिंचाई प्रणाली है जिसमें पाइप, ट्यूब और छोटे-छोटे ड्रिपर की मदद से पानी धीरे-धीरे पौधों की जड़ों में दिया जाता है. इसमें पानी सीधे उस जगह जाता है जहां पौधे को जरूरत होती है, इसलिए पानी बेकार नहीं जाता है.
5 बीघा खेत में पानी की खपत
आमतौर पर 1 बीघा खेत की सिंचाई में पारंपरिक तरीके से काफी पानी लग जाता है. अगर हम औसतन देखें तो 1 बीघा खेत में पारंपरिक सिंचाई से लगभग 25,000 से 35,000 लीटर पानी प्रति सिंचाई लग सकता है यानी 5 बीघा खेत में यह खपत लगभग 1,25,000 से 1,75,000 लीटर प्रति सिंचाई तक पहुंच सकती है. यह बहुत ज्यादा मात्रा है और इसमें पानी का बड़ा हिस्सा बर्बाद भी हो जाता है.
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ड्रिप इरिगेशन से कितना पानी बचेगा?
ड्रिप इरिगेशन का सबसे बड़ा फायदा यही है कि यह पानी की बर्बादी को बहुत कम कर देता है. ड्रिप सिस्टम में लगभग 30 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक पानी की बचत हो सकती है. अगर 5 बीघा खेत में 1,50,000 लीटर पानी लगता है, तो ड्रिप से लगभग 75,000 से 1,00,000 लीटर तक पानी बच सकता है. यह बचत सिर्फ एक बार की नहीं होती, बल्कि हर सिंचाई में होती है. लंबे समय में यह बहुत बड़ा अंतर पैदा करती है.
किसानों को क्या फायदा होता है?
ड्रिप इरिगेशन सिर्फ पानी ही नहीं बचाता, बल्कि कई फायदे देता है. इससे फसल की पैदावार बढ़ती है और खरपतवार कम उगते हैं. इसके अलावा खाद का सही उपयोग होता है. साथ ही मजदूरी और समय दोनों की बचत होती है.
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