E Nam Yojana:डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब खेती-किसानी का तरीका भी पूरी तरह बदल चुका है. पहले किसानों के सामने सबसे बड़ी टेंशन यह होती थी कि खून-पसीना एक करके उगाई गई फसल को सही दाम पर कहाँ बेचें. लेकिन अब ई-नाम (e-NAM) पोर्टल ने इस परेशानी का परमानेंट इलाज कर दिया है.
यह एक ऐसा ऑनलाइन मार्केटप्लेस है जिसने देश भर की मंडियों को एक छत के नीचे ला दिया है. अब आपको अपनी उपज लेकर दर-दर भटकने या बिचौलियों के सामने हाथ जोड़ने की जरूरत नहीं है. बस एक क्लिक के जरिए आप अपनी फसल की डिटेल ऑनलाइन डाल सकते हैं. जान लें पूरी प्रोसेस.
ई-नाम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन
इस डिजिटल सुविधा का फायदा लेने के लिए आपको ई-नाम की ऑफिशियल वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा. प्रोसेस इतना आसान है कि कोई भी किसान इसे खुद ही पूरा कर सकता है. एक बार आईडी बनने के बाद आप अपनी फसल की जानकारी पोर्टल पर शेयर कर सकते हैं.
इसके बाद पूरे देश के खरीदार आपकी फसल पर अपनी-अपनी बोली लगाते हैं. सबसे खास बात यह है कि किसान को किसी के दबाव में आने की जरूरत नहीं होती. आप अपनी मर्जी से उस खरीदार को चुन सकते हैं जो आपको सबसे ज्यादा दाम दे रहा हो. यह सिस्टम पूरी तरह से पारदर्शी है और किसानों को अपनी शर्तों पर व्यापार करने की आजादी देता है.
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डिजिटल पेमेंट
अक्सर लोकल मार्केट में फसल की क्वालिटी को लेकर बहस होती है, लेकिन ई-नाम पर साइंटिफिक तरीके से क्वालिटी चेक की सुविधा मिलती है. जब आपकी फसल का ग्रेड तय हो जाता है. तो खरीदार बिना किसी शक के ऊंची बोली लगाते हैं.
पेमेंट के मामले में भी यह सिस्टम बहुत ही एडवांस है. फसल बिकते ही उसका पैसा सीधे आपके बैंक अकाउंट में डिजिटल तरीके से ट्रांसफर हो जाता है. इससे न तो कैश कैरी करने का डर रहता है और न ही पेमेंट के लिए हफ्तों तक इंतजार करना पड़ता है.
किसानों के लिए बड़े फायदे
आज के समय में ई-नाम पोर्टल किसानों के लिए एक बहुत बड़ा एसेट साबित हो रहा है क्योंकि यह आपको बिचौलियों के जाल से बाहर निकालता है. अब आप सिर्फ अपने आसपास की मंडियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आपकी पहुंच पूरे देश के बड़े बाजारों तक हो गई है.
इससे न केवल आपकी इनकम बढ़ती है. बल्कि आपको मार्केट के ताजा भावों की भी पूरी जानकारी रहती है. रीयल-टाइम अपडेट्स की मदद से आप सही समय पर अपनी फसल बेचने का फैसला ले सकते हैं.
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