Aquaponic Farming Tips: खेती-किसानी के मामले में आजकल एक्वापोनिक्स काफी ट्रेंड में है और इसकी वजह है कम मेहनत में मिलने वाला तगड़ा रिटर्न. इसमें एक ही सेटअप के अंदर मछलियां भी पलती हैं और सब्जियां भी उगाई जाती हैं. इसमें मछलियों का वेस्ट पौधों के लिए बेस्ट खाद का काम करता है और पौधे बदले में पानी को फिल्टर कर देते हैं. अगर आप कम जमीन और कम पानी के साथ अपना खुद का एग्रो-बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं. तो यह तरीका आपके लिए एकदम परफेक्ट और जल्दी रिजल्ट देने वाला साबित हो सकता है. जान लीजिए इसका सही तरीका.
ऐसे करें एक्वापोनिक्स खेती
इस खेती को शुरू करने के लिए आपको एक फिश टैंक, ग्रो-बेड (पौधों के लिए जगह) और पानी के पंप की जरूरत होती है. स्मार्ट एक्वापोनिक्स में अब सेंसर और इंटरनेट तकनीक का भी इस्तेमाल हो रहा है. जिससे आप मोबाइल पर ही पानी के तापमान और ऑक्सीजन लेवल की निगरानी कर सकते हैं. इसमें पौधों की जड़ें सीधे पानी में या कंकड़-पत्थर वाले मीडियम में होती हैं.
जहां उन्हें मछलियों के वेस्ट से नाइट्रोजन और जरूरी मिनरल्स मिलते रहते हैं. यह पूरा सिस्टम एक साइकिल की तरह काम करता है जहां पानी लगातार रिसाइकिल होता रहता है. जिससे पौधों की ग्रोथ आम खेती के मुकाबले काफी तेजी से होती है.
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इतना आता है खर्च
एक्वापोनिक्स की शुरुआत में इन्वेस्टमेंट थोड़ा ज्यादा लग सकता है क्योंकि आपको फिश टैंक, पाइपिंग, पंप और सेंसर सेटअप करने होते हैं. छोटे लेवल पर यानी घर की छत या बैकयार्ड से शुरू करने के लिए 50 हजार से 1 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है. जबकि बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के लिए लागत बढ़ जाती है.
हालांकि इसमें पानी की 90% बचत होती है और खाद या कीटनाशकों का खर्चा लगभग जीरो होता है. जिससे लॉन्ग टर्म में यह काफी किफायती पड़ता है. सोलर पैनल का इस्तेमाल करके आप बिजली के बिल को भी कंट्रोल कर सकते हैं. जिससे आपका प्रॉफिट मार्जिन और भी बेहतर हो जाता है.
इन बातों का रखें ध्यान
इस बिजनेस में सबसे जरूरी है मछलियों और पौधों के बीच का बैलेंस बनाए रखना. आपको समय-समय पर पानी की टेस्टिंग करनी चाहिए जिससे अमोनिया का लेवल न बढ़े. क्योंकि यह मछलियों के लिए नुकसानदेह हो सकता है. तो इसके साथ ही बिजली की सप्लाई 24 घंटे होनी चाहिए जिससे पानी का सर्कुलेशन न रुके और ऑक्सीजन लेवल बना रहे. शुरुआत करने से पहले किसी अच्छी जगह से ट्रेनिंग लेना या छोटे पायलट प्रोजेक्ट से एक्सपीरिएंस लेना बहुत काम आता है.
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