MP Kisan Helpline: देश में किसानों के लिए तमाम राज्यों की सरकारें अलग-अलग तरह की योजनाएं चलाती रहती हैं. जिससे खेती किसानों में उन्हें मदद मिल सके. इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश के किसानों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी सुविधा की शुरुआत की है. अब किसानों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने या घंटों इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी.
सरकार ने एक डेडिकेटेड हेल्पलाइन नंबर 155253 जारी किया है. जो सीधे किसानों की शिकायतों और उनकी जरूरतों से जुड़ा होगा. यह कदम खेती-किसानी को और भी ज्यादा आसान और डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है. जान लीजिए कैसे काम करेगी ये हेल्पलाइन.
कैसे काम करेगा यह नया हेल्पलाइन नंबर?
यह हेल्पलाइन नंबर 155253 पूरी तरह से सेंट्रलाइज्ड सिस्टम पर काम करेगा. जहां कॉल सेंटर के जरिए किसानों की बात सुनी जाएगी. जैसे ही कोई किसान इस नंबर पर कॉल करेगा, उसकी समस्या को दर्ज किया जाएगा और संबंधित विभाग को तुरंत फॉरवर्ड कर दिया जाएगा. इस सिस्टम की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें फीडबैक का भी प्रावधान है.
यानी समस्या सुलझने के बाद किसान से पूछा जाएगा कि क्या वह समाधान से संतुष्ट है. यह नंबर टोल-फ्री रहने वाला है. जिसका मतलब है कि किसानों को कॉल करने के लिए कोई पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा. इस मॉडर्न सिस्टम के पीछे की सोच यह है कि किसानों को एक ऐसा प्लेटफॉर्म दिया जाए जहां उनकी बात को गंभीरता से सुना जाए और उसका एक तय समय सीमा के अंदर समाधान निकाला जाए.
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बीज से लेकर सरकारी योजनाओं तक की जानकारी
अक्सर किसानों को इस बात की चिंता रहती है कि उन्हें सही बीज कहां से मिलेंगे या सरकार की नई योजनाओं का लाभ कैसे उठाएं. इस हेल्पलाइन नंबर के जरिए किसान फसलों की बीमारियों, कीटनाशकों के सही इस्तेमाल और मौसम के पूर्वानुमान के बारे में भी अपडेट्स ले सकेंगे.
अगर किसी किसान को पीएम किसान सम्मान निधि या राज्य सरकार की किसी खास स्कीम में कोई दिक्कत आ रही है. तो वह सीधे 155253 पर डायल करके मदद मांग सकता है. इसके अलावा खाद की उपलब्धता और मंडी के ताजा भावों की जानकारी भी इसी एक नंबर पर उपलब्ध होगी.
भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम
मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा शुरू की गई इस पहल का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि सिस्टम में पारदर्शिता आएगी. जब हर शिकायत का रिकॉर्ड डिजिटल तौर पर दर्ज होगा. तो निचले स्तर के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट पाएंगे.
इससे न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी बल्कि सरकारी मशीनरी की जवाबदेही भी तय होगी. किसानों को अक्सर पटवारी या स्थानीय केंद्रों पर जिन छोटी-मोटी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, अब उनका रिकॉर्ड सीधे भोपाल स्थित मुख्यालय तक पहुंचेगा.
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